ई-पंजीकरण व्यवस्था पर यूपी सरकार का यू-टर्न: 4 जून का आदेश निरस्त, पुरानी व्यवस्था ही रहेगी लागू… मुरादाबाद में अधिवक्ता का आमरण अनशन खत्म

लव इंडिया, लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग ने विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों के प्रथम पंजीकरण के लिए प्रस्तावित नई ई-पंजीकरण व्यवस्था को फिलहाल वापस ले लिया है। विभाग ने 4 जून 2026 को जारी अपना आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही अब संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया पहले की तरह उप-पंजीयक कार्यालयों के माध्यम से ही जारी रहेगी।

यह निर्णय प्रदेशभर के अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स द्वारा किए गए विरोध के बाद लिया गया है। नई व्यवस्था को लेकर लगातार आपत्तियां सामने आने के बाद विभाग ने अपने निर्णय पर पुनर्विचार किया।

क्या थी नई व्यवस्था?

स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों के प्रथम पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाना था। इसमें खरीदार, विक्रेता, अधिवक्ता और डीड राइटर की व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता समाप्त करने का प्रस्ताव था।

नई प्रणाली के तहत लेखपत्र ऑनलाइन भेजे जाने थे तथा पंजीयन कार्यालय से ही आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई जा रही थी। उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाना था।

वकीलों और डीड राइटर्स ने जताया विरोध

नई व्यवस्था लागू होने की घोषणा के बाद प्रदेशभर के अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि यदि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई तो उनके रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और वर्षों से चली आ रही कार्य प्रणाली प्रभावित होगी।

विरोध प्रदर्शन और विभिन्न संगठनों की ओर से ज्ञापन दिए जाने के बाद विभाग ने मामले की समीक्षा की।

अब क्या रहेगी व्यवस्था

स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के नए आदेश के अनुसार 4 जून 2026 से पहले जो व्यवस्था लागू थी, वही फिलहाल प्रभावी रहेगी।

अब विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों के प्रथम पंजीकरण के लिए संबंधित पक्षों को पहले की तरह उप-पंजीयक कार्यालय में उपस्थित होकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। खरीदार, विक्रेता, अधिवक्ता और डीड राइटर की भागीदारी यथावत बनी रहेगी।

प्रमुख सचिव ने जारी किया नया आदेश

स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के प्रमुख सचिव अमित गुप्ता द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अगली व्यवस्था लागू होने तक पूर्व में प्रचलित प्रणाली के अनुसार ही संपत्ति पंजीकरण का कार्य किया जाएगा।

इस निर्णय के बाद प्रदेशभर के अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स ने राहत व्यक्त की है।

भविष्य में फिर आ सकती है डिजिटल व्यवस्था

हालांकि विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में आवश्यक सुझावों और तकनीकी सुधारों के बाद नई डिजिटल व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जा सकता है। फिलहाल सभी पंजीकरण कार्य पारंपरिक प्रक्रिया के अनुसार ही संपन्न होंगे।

मुरादाबाद में अधिवक्ता का आमरण अनशन खत्म

इस बीच, सोमवार को महानिरीक्षक निबंधन की ओर से ई पंजीकरण माँडयूल संबंधितआदेश को वापस लेने के आदेश जारी हुए। पत्र के बाद अधिवक्ता भी फूले न समाए। दरअसल मुरादाबाद में वकीलों ने आंदोलन के क्रम में आमरण अनशन शुरु किया। पहले दिन धरना स्थल पर अधिवक्ता अभिनव भट्ट बैठे थे। नया शासनादेश जारी हुआ तो बार एसोसिएशन अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता व महासचिव कपिल गुप्ता समेत तमाम वकील धरना स्थल पर पहुंचे। आमरण अनशन पर बैठे अधिवक्ता को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।

अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता का कहना है कि शासन से पत्र जारी हुआ है। फिलहाल अधिवक्ता को जूस पिलाकर अनशन समाप्त किया गया है।मुख्यमंत्री से मुलाकात होनी बाकी है।अभी हड़ताल समाप्त नहीं हुई है। इस दौरान योगेंद्र चौधरी, पुष्प यादव, प्रदीप गुप्ता, राजीव चौधरी, सेवी शर्मा, समिताब सिंह, सौरभ चक्रवर्ती, मयंक शर्मा सहित तमाम अधिवक्ता रहे।

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