TMU में खिरी गणधर परमेष्ठि की दिव्य ध्वनि

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के रिद्धि-सिद्धि भवन में आध्यात्मिक अनुष्ठान- श्री मज्जिनेन्द्र कल्पद्रुम महामण्डल विधान जारी

लव इंडिया, मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के रिद्धि-सिद्धि भवन में आध्यात्मिक अनुष्ठान- श्री मज्जिनेन्द्र कल्पद्रुम महामण्डल विधान में समोशरण पूजन में मानव स्तम्भ पूजा, चैत्य प्रसाद पूजा, जल खातिका पूजा, उपवन भूमि पूजा, लतावन भूमि पूजा अष्ट अर्ध्य से विधि-विधान से हुईं। प्रज्ञाश्रवण उपाध्याय श्री 108 प्रज्ञानंद मुनि महाराज जी ने गणधर श्री ऋषभ सेन की भूमिका का निर्वाह किया। गणधर श्री ऋषभ सेन परमेष्ठि जी की ओमकारमय दिव्य ध्वनि आस्था का केंद्र रही।

प्रज्ञानंद मुनि महाराज जी से सम्राट भरत चक्रवर्ती के रूप में टीएमयू के जीवीसी श्री मनीष जैन ने प्रश्न किया, कल्पद्रुम महामण्डल विधान से कौन से पुण्य की प्राप्ति होगी? श्री 108 प्रज्ञानंद जी ने इस सवाल का सारगर्भित जवाब देते हुए सम्यकत्व की महिमा का महत्व बताया।

रिद्धि-सिद्धि भवन में महायज्ञ नायक की भूमिका में कुलाधिपति श्री सुरेश जैन के अलावा फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, श्रीमती ऋचा जैन, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन, श्रीमती जहान्वी जैन की गरिमामयी मौजूदगी रही। कल्पद्रुम महामण्डल विधान में अमरोहा के जैन समाज से श्री अतुल जैन, नगरपालिका अध्यक्षा श्रीमती शशी जैन की उल्लेखनीय मौजूदगी रही।

रिद्धि-सिद्धि भवन में कल्पद्रुम महामण्डल विधान के दौरान श्री 108 प्रज्ञानंद जी के संग-संग मुनि श्री सभ्यानंद जी मुनिराज, कर्मयोगी क्षुल्लकरत्न गिरनार पीठाधीश श्री 105 समर्पण सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री 105 दिव्यानंद जी महाराज, क्षुल्लक श्री 105 प्रबुद्धानंद जी महाराज सरीखे जैन संतों के मंगल आशीर्वाद से श्रीजी का अभिषेक हुआ और शांतिधारा कराई गई।

महामण्डल विधान में शिखर जी से आए ऋषभशास्त्री और श्री मनीष शास्त्री के अलावा श्री ऋषि जैन, श्रीमती निधि जैन, वीसी प्रो. वीके जैन, श्री मनोज जैन, प्रो. विपिन जैन, प्रो. रवि जैन, डॉ. रत्नेश जैन, डॉ. अक्षय जैन, श्री विपिन जैन, श्री अंकित जैन, डॉ. अर्चना जैन, श्रीमती नीलम जैन, श्रीमती नीलिमा जैन आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रही।


कुलाधिपति और जीवीसी ने श्रीजी की शांतिधारा की
रिद्धि-सिद्धि भवन में श्री मज्जिनेन्द्र कल्पद्रुम महामण्डल विधान आत्म-साधना, गहन ज्ञान और भक्ति संगम के रूप में मनाया गया। प्रज्ञाश्रवण उपाध्याय श्री 108 प्रज्ञानंद मुनि महाराज, मुनि श्री सभ्यानंद जी मुनिराज, कर्मयोगी क्षुल्लकरत्न गिरनार पीठाधीश श्री 105 समर्पण सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री 105 दिव्यानंद जी महाराज, क्षुल्लक श्री 105 प्रबुद्धानंद जी महाराज सरीखे जैन संतों ने श्रावक-श्रावकिाओं को जैन दर्शन के मूल सिद्धांत- सम्यक दर्शन की महिमा से परिचित कराया। कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन श्री मनीष जैन ने श्रीजी की शांतिधारा की। विधान में उपस्थित समस्त मुनि संघ और आर्यिका रत्न ज्ञानमती माताजी के निमित्त भी विशेष अर्घ्य समर्पित किए गए।

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