AHPi West UP Summit : स्वास्थ्य योजनाओं में आ रही व्यावहारिक दिक्कतें बनीं अस्पतालों की नई चुनौती


📰 मुरादाबाद में एएचपीआई पश्चिम यूपी समिट🔴


उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक समस्याएं अब अस्पतालों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। इन्हीं मुद्दों पर मंथन के लिए एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (AHPi) उत्तर प्रदेश चैप्टर द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश समिट का आयोजन किया गया। दिल्ली रोड स्थित होटल हॉलिडे रिजेंसी में आयोजित इस समिट में पश्चिम यूपी के कई जिलों से अस्पताल संचालकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और नीति से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।


🔹 कार्यक्रम का शुभारंभ
समिट का शुभारंभ मुरादाबाद के मंडल आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह, एएचपीआई के डायरेक्टर जनरल गिरधर ज्ञानी, पश्चिम यूपी चैप्टर अध्यक्ष एवं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, एएचपीआई कोषाध्यक्ष डॉ. मगन मेहरोत्रा और संयुक्त सचिव डॉ. अंकुर गोयल द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।


🔹 पश्चिम यूपी से बड़ी संख्या में पहुंचे अस्पताल संचालक
इस समिट में मुरादाबाद, बरेली, रामपुर, अमरोहा, संभल, बिजनौर, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, नोएडा और ग्रेटर नोएडा सहित आसपास के क्षेत्रों के निजी अस्पतालों के संचालक और चिकित्सा विशेषज्ञ मौजूद रहे। सभी ने स्वास्थ्य योजनाओं के जमीनी अनुभव साझा किए।


🟩 मंडल आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह का बयान
मंडल आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने समकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर नीति निर्माताओं का दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि सरकार आम नागरिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही अस्पताल संचालकों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए उनके समाधान के लिए भी सरकार गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय से ही स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाया जा सकता है।


🟩 एएचपीआई डायरेक्टर जनरल गिरधर ज्ञानी का बयान
मुख्य अतिथि एएचपीआई के डायरेक्टर जनरल गिरधर ज्ञानी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में एक मरीज के इलाज पर प्रतिदिन औसतन करीब 7,800 रुपये खर्च होते हैं, जबकि निजी अस्पतालों में यह खर्च लगभग 9,000 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के साथ एक सांकेतिक बिल भी दिया जाना चाहिए, भले ही उससे कोई शुल्क न लिया जाए। इससे नागरिकों को यह जानकारी मिलेगी कि सरकार उनकी सेहत पर कितना निवेश कर रही है। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास और सम्मान दोनों बढ़ेंगे।


🟩 डॉ. अनुराग मेहरोत्रा का बयान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश चैप्टर अध्यक्ष एवं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी परेशानी क्लेम और पैकेज को लेकर सामने आ रही है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में समय पर क्लेम लगाए जाने के बावजूद तीन महीने बाद उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है। इससे अस्पतालों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है और मरीजों के इलाज की निरंतरता भी बाधित होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि आयुष्मान से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर पैनल का गठन किया जाना चाहिए।


🟩 कार्यक्रम संचालन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनस फहीम ने किया। समिट में स्वास्थ्य योजनाओं, प्रशासनिक चुनौतियों और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अन्य विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

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