स्वरा भास्कर के जौहर बयान पर VHP की जिला संयोजिका दीपा वार्ष्णेय ने जताई आपत्ति

लव इंडिया, संभल। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर की ओर से फिल्म पद्मावत में दिखाए गए जौहर के दृश्य पर की गई टिप्पणी को लेकर विश्व हिंदू परिषद की संभल जिला संयोजिका दीपा वार्ष्णेय ने आपत्ति जताई है।दीपा वाष्र्णेय ने अपने बयान में कहा कि जौहर को केवल आत्महत्या या हार के नजरिए से देखना उचित नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या जौहर किसी हार का नाम था? क्या जौहर किसी मजबूरी में उठाया गया कदम था?” उनके अनुसार, जौहर को राजपूत महिलाओं के स्वाभिमान और साहस की ऐतिहासिक परंपरा के रूप में देखा जाता है।उन्होंने कहा कि इतिहास के उन दौरों में महिलाओं ने अपनी अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए जौहर का रास्ता चुना। उन्होंने जौहर को कायरता नहीं बल्कि साहस और आत्मसम्मान का प्रतीक बताया।

स्वरा भास्कर ने क्या कहा था?

दरअसल, 31 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘Woman | Life | Freedom’ कार्यक्रम में स्वरा भास्कर ने पद्मावत के जौहर दृश्य पर अपनी पुरानी आपत्ति दोहराई थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि फिल्म का यह दृश्य यौन हिंसा से बची महिलाओं को क्या संदेश देता है और क्या किसी महिला की जिंदगी यौन हिंसा के बाद समाप्त मान ली जानी चाहिए।

उनकी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हुआ और कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने जौहर करने वाली महिलाओं को कायर कहा। हालांकि स्वरा भास्कर ने बाद में सफाई देते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा था। उनका कहना था कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और उनका सवाल फिल्म में जौहर के चित्रण तथा उसके आधुनिक सामाजिक संदेश को लेकर था।

दीपा वार्ष्णेय ने जताया विरोध

दीपा वार्ष्णेय ने कहा कि भारतीय इतिहास और परंपराओं से जुड़े ऐसे प्रसंगों को आधुनिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय उनके ऐतिहासिक संदर्भ को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जौहर को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक और आधुनिक दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन इसे केवल कायरता के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

उन्होंने लोगों से अपने इतिहास और पूर्वजों के बलिदान को समझने तथा उसके प्रति सम्मान रखने की अपील की। दीपा वार्ष्णेय ने अपने बयान का समापन करते हुए कहा कि भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराएं देश की पहचान का हिस्सा हैं और इनके प्रति समाज को जागरूक रहना चाहिए।

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