शुभ मुहूर्त में हुआ होलिका दहन, मगर रंग-गुलाल से किया परहेज


मुरादाबाद के गली-मोहल्लों में घर-घर जली होलिका, चंद्र ग्रहण के कारण सुबह फीका रहा रंगोत्सव


मुरादाबाद। इस वर्ष होली का पर्व धार्मिक गणनाओं और चंद्र ग्रहण के प्रभाव के बीच मनाया गया। शहर के विभिन्न गली-मोहल्लों में तड़के सवा चार बजे के बाद शुभ मुहूर्त में होलिका दहन तो पूरे विधि-विधान से किया गया, लेकिन रंग-गुलाल खेलने से अधिकांश लोगों ने परहेज किया। दोपहर बाद लगने वाले चंद्र ग्रहण और सूतक काल के कारण सुबह का रंगोत्सव सीमित रहा, जबकि कई स्थानों पर शाम को ग्रहण समाप्ति के बाद रंग खेलने की तैयारी की गई।


शुभ समय में जली होलिका


ज्योतिषाचार्यों द्वारा बताए गए शुभ मुहूर्त में मुरादाबाद के कटघर, लाइनपार, बुद्धि विहार, हरथला, सिविल लाइंस और अन्य क्षेत्रों में होलिका दहन किया गया।


मोहल्लों में लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ लकड़ियों की वेदी सजाकर पूजा-अर्चना की और परिवार सहित होलिका की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की।


ग्रहण और सूतक का असर


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से पूर्व सूतक काल प्रभावी हो जाता है। दोपहर बाद ग्रहण लगने की सूचना के कारण सुबह से ही लोगों में सतर्कता दिखाई दी। कई परिवारों ने रंग खेलने से परहेज किया और निर्णय लिया कि ग्रहण समाप्ति के बाद ही रंगोत्सव मनाया जाएगा।


विशेषज्ञों के अनुसार सूतक काल में मांगलिक कार्यों और उत्सवों से बचना चाहिए, इसी कारण सुबह का माहौल अपेक्षाकृत शांत रहा।


शाम को रंगों की तैयारी


कई इलाकों में लोगों ने तय किया कि चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद ही रंग-गुलाल खेला जाएगा। युवाओं और बच्चों में उत्साह बना रहा, लेकिन उन्होंने बड़ों की सलाह का पालन करते हुए परंपरा के अनुसार समय का इंतजार किया।


प्रशासन रहा सतर्क


त्योहार और ग्रहण के मद्देनज़र प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बनाए रखी। पुलिस बल की तैनाती रही और शांति व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।


कुल मिलाकर अब रंगोत्सव का इंतजार


इस बार मुरादाबाद में होली परंपरा और खगोलीय घटनाओं के बीच संतुलन के साथ मनाई गई। होलिका दहन पूरे उत्साह से हुआ, लेकिन रंगोत्सव का रंग ग्रहण की छाया में कुछ समय के लिए थम गया।

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