15 लाख की फिरौती के लिए 10 वर्षीय मासूम का अपहरण कर की थी हत्या, मुख्य आरोपी समेत दो को उम्रकैद
लव इंडिया, मुरादाबाद। वर्ष 2015 में 10 वर्षीय मासूम सोनू के अपहरण, फिरौती मांगने और हत्या के बहुचर्चित मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) ने मुख्य आरोपी समेत एक अन्य दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, मुख्य आरोपी की पत्नी व एक अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
बारात देखने गया था मासूम, फिर नहीं लौटा घर

अभियोजन पक्ष के अनुसार अविभाजित मुरादाबाद जनपद के थाना कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के इमरतपुर स्योडारा गांव निवासी मान सिंह यादव का बेटा सोनू (10 वर्ष) 21/22 फरवरी 2015 में गांव में आई बारात देखने गया था। देर रात तक घर वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई।
फोन कर मांगी थी 15 लाख रुपये की फिरौती
अभियोजन पक्ष के अनुसार गुमशुदगी के अगले दिन परिजनों के मोबाइल पर फोन आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि बच्चा उसके कब्जे में है और उसे सुरक्षित वापस पाने के लिए 15 लाख रुपये की फिरौती देने को कहा। साथ ही रकम न देने पर बच्चे की हत्या करने की धमकी भी दी गई थी।
जांच में सामने आया अपहरण और हत्या का मामला

पुलिस जांच के दौरान गुमशुदगी का मामला अपहरण और हत्या में बदल गया। विवेचना के बाद पुलिस ने गांव के ही प्रेमपाल यादव और नरेश को गिरफ्तार किया। इसमें सबसे खास बात यह थी की आरोपी प्रेमपाल यादव ही बच्चों को ढूंढने का बहाना बनाते हुए अपनी गाड़ी लेकर मुद्दे और उसके परिवार के साथ घूमता रहा जबकि गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने प्रेमपाल यादव की निशानदेही पर ही 10 वर्षीय सोनू का शव बरामद किया था। लाश बुरी तरह सड़ चुकी थी लेकिन 5 दिन के बाद हुए पोस्टमार्टम में 10 वर्ष के सोनू की मौत का कारण गला घोटने बताया गया।
इसी आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रेमपाल यादव की बुलेरो की तलाश की लेकिन नहीं मिली बाद में मुख्य आरोपी प्रेमपाल यादव की पत्नी आशा की निशानदेही पर बुलेरो को बरामद किया जबकि जिस मोबाइल से 15 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई, वह गांव के ही नरेश का था। इसके बाद कुढ़फतेहगढ़ पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) धीरेंद्र सिंह के न्यायालय में चली।
अदालत ने सुनाया फैसला

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) धीरेंद्र सिंह ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मुख्य आरोपी प्रेमपाल व नरेश को अपहरण, फिरौती और हत्या के अपराध में दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी को शेष जीवन कारावास में रहना होगा।
वहीं मामले में नामजद श्रीमती आशा देवी (मुख्य आरोपी की पत्नी) और एक अन्य आरोपी अरविंद को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण बरी कर दिया गया।
परिवार को वर्षों बाद मिला न्याय

करीब एक दशक से अधिक समय तक चले इस मामले में अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। यह मामला उस समय क्षेत्र में काफी चर्चित रहा था और फिरौती के लिए अपहरण के बाद मासूम की हत्या ने लोगों को झकझोर दिया था।
