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दीपावली कल: विधि-विधान से करें मां लक्ष्मी और गणेश का पूजन, जानिए घर और व्यापार के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त और पूजा की पूरी विधि

लव इंडिया, मुरादाबाद। दीपावली का पावन पर्व कल, रविवार 8 नवंबर को मनाया जाएगा। दीपों का यह त्योहार केवल घर को रोशनी से सजाने और खुशियां बांटने का अवसर नहीं है, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा में इसे मां लक्ष्मी के स्वागत, भगवान गणेश की आराधना, सुख-समृद्धि और नए संकल्पों का महापर्व माना गया है।
मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की रात्रि में विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश का पूजन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। यही कारण है कि दीपावली पर लोग अपने घरों, दुकानों, प्रतिष्ठानों और कार्यालयों की साफ-सफाई कर उन्हें दीपों, रंगोली और फूलों से सजाते हैं।

लेकिन दीपावली पूजन में केवल शुभ मुहूर्त का ही नहीं, बल्कि पूजन की सही विधि, मन की पवित्रता, घर की स्वच्छता और श्रद्धा का भी विशेष महत्व है।
इस बार दीपावली पर गृहस्थ परिवारों और व्यापारियों के लिए पूजन की तैयारी किस प्रकार करनी चाहिए, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कैसे करें तथा घर और व्यापार के लिए शुभ समय क्या है, आइए जानते हैं विस्तार से।
मुरादाबाद में मां लक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त

मुरादाबाद के स्थानीय समय के अनुसार रविवार, 8 नवंबर 2026 को मां लक्ष्मी के पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 5 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
इस अवधि में प्रदोष काल और वृषभ स्थिर लग्न का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी का पूजन करना विशेष शुभ माना जाता है।
पूजन के महत्वपूर्ण समय इस प्रकार हैं:

- सूर्यास्त : शाम 5:24 बजे
- प्रदोष काल : शाम 5:24 से रात 8:02 बजे तक
- वृषभ स्थिर लग्न : शाम 5:48 से 7:43 बजे तक
- लक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त : शाम 5:48 से 7:43 बजे तक
- महानिशीथ काल : रात 11:33 से 12:25 बजे तक।
गृहस्थ परिवारों के लिए शाम का प्रदोष काल और वृषभ स्थिर लग्न मुख्य लक्ष्मी पूजन के लिए विशेष महत्व रखते हैं। महानिशीथ काल में विशेष पूजा की परंपरा कुछ विशिष्ट धार्मिक साधनाओं में प्रचलित है।
घर में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कैसे करें?

दीपावली की पूजा शुरू करने से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें। धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सकारात्मकता का संचार होता है।
1. पूजा स्थल की तैयारी
घर के पूजा स्थान को साफ करके गंगाजल छिड़कें। चौकी पर लाल या पीला स्वच्छ कपड़ा बिछाएं। चौकी पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। प्रतिमाओं के पास मां सरस्वती और भगवान कुबेर का भी स्मरण करें।
2. पूजन सामग्री

पूजा से पहले आवश्यक सामग्री एकत्र कर लें।
- रोली, कुमकुम और हल्दी
- अक्षत यानी साबुत चावल
- फूल और फूलों की माला
- पान, सुपारी और लौंग
- कलावा और मौली
- गंगाजल और शुद्ध जल
- कलश और नारियल
- मिठाई, फल और बताशे
- धूप, दीपक और घी
- कमल का फूल उपलब्ध हो तो विशेष रूप से रखें।
- नए बहीखाते और कलम।
3. गणेश पूजन से करें शुरुआत
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। इसलिए सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और उन्हें फूल, अक्षत, दूर्वा तथा मोदक या लड्डू अर्पित करें।
इसके बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए उन्हें पुष्प, कुमकुम, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।
4. मां लक्ष्मी का पूजन और मंत्र जाप

मां लक्ष्मी के समक्ष दीप प्रज्वलित करके श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का जाप करें।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
इसके बाद श्रीसूक्त, लक्ष्मी चालीसा अथवा लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
भगवान गणेश के लिए इस मंत्र का जाप करें।
ॐ गं गणपतये नमः।
5. आरती और प्रसाद वितरण
पूजन संपन्न होने के बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य आरती में शामिल हों। इसके बाद प्रसाद वितरित करें और परिवार की सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना करें।
ध्यान रहे कि अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में पूजा की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है।
व्यापारियों के लिए लक्ष्मी पूजन और बहीखाता पूजन

दीपावली का पर्व व्यापारियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन दुकानदार, कारोबारी, उद्यमी और व्यापारी वर्ग अपने प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की पूजा करते हैं।
व्यापारिक प्रतिष्ठानों में इन बातों का ध्यान रखें।
- दुकान, कार्यालय और गोदाम की अच्छी तरह सफाई करें।
- मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण और फूलों से सजावट करें।
- पूजा स्थल पर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- नए बहीखाते, रजिस्टर, कलम और लेखा पुस्तकों को पूजा में रखें।
- तिजोरी, गल्ले और कैश काउंटर पर तिलक लगाकर पूजा करें।
- भगवान कुबेर का स्मरण करते हुए धन-संपत्ति के सदुपयोग का संकल्प लें।
- व्यापार में ईमानदारी, पारदर्शिता और ग्राहकों के प्रति अच्छे व्यवहार का संकल्प लें।
व्यापारियों के लिए भी शाम 5:48 से 7:43 बजे तक का स्थिर लग्न विशेष रूप से विचारणीय है। इस अवधि में लक्ष्मी-गणेश पूजन और बहीखाता पूजन संपन्न किया जा सकता है।
दीपावली पर कितने दीपक जलाएं और कहां रखें?

दीपावली का नाम ही दीपों की पंक्ति से जुड़ा है। इस दिन मिट्टी के दीपक जलाने की परंपरा है।
- घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
- पूजा स्थल पर घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- घर की चौखट और आंगन में दीप सजाएं।
- तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं।
- घर की बालकनी और छत पर सुरक्षित स्थानों पर दीप रखें।
- जरूरतमंद परिवारों को दीपक और पूजन सामग्री देकर उनकी खुशियों में सहभागी बनें।
धार्मिक परंपराओं में दीपदान का विशेष महत्व माना गया है। दीपक केवल घर को रोशन नहीं करते, बल्कि अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश भी देते हैं।
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इन बातों का रखें विशेष ध्यान

दीपावली के दिन कुछ ऐसी बातें हैं, जिनका ध्यान रखना धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
1. घर में स्वच्छता बनाए रखें: पूजा से पहले घर के हर कोने की सफाई करें। अनावश्यक सामान और कूड़ा बाहर निकालें।
2. घर में कलह न करें: परिवार के सभी सदस्य प्रेम और सद्भाव के साथ त्योहार मनाएं।
3. किसी जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएं: सामर्थ्य के अनुसार गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या आर्थिक सहायता दें।
4. महिलाओं और बुजुर्गों का सम्मान करें: परिवार में सभी के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव रखें।
5. उधार और दिखावे से बचें: दीपावली पर अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही खरीदारी करें।
6. जुआ और नशे से दूर रहें: त्योहार को अनुशासन, सद्भाव और प्रसन्नता के साथ मनाएं।
दीपावली पर पर्यावरण और सुरक्षा का भी रखें ध्यान

दीपावली खुशियों का त्योहार है, इसलिए इसे सुरक्षित तरीके से मनाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
- बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें।
- पटाखे जलाते समय पानी और रेत की बाल्टी पास रखें।
- घर के अंदर और बंद स्थानों पर पटाखे न जलाएं।
- बुजुर्गों, हृदय रोगियों और छोटे बच्चों को धुएं से बचाएं।
- बिजली की झालरों और सजावटी लाइटों के तारों की जांच करें।
- मिट्टी के दीपक सुरक्षित स्थानों पर रखें।
- पशु-पक्षियों और पर्यावरण का ध्यान रखें।
दीपावली का वास्तविक संदेश: केवल धन नहीं, अच्छे कर्म भी जरूरी

दीपावली का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह पर्व हमें अपने जीवन में सदाचार, परिश्रम, सेवा, दया और मानवता को अपनाने की प्रेरणा देता है।
मां लक्ष्मी की आराधना के साथ हमें यह भी समझना चाहिए कि धन का सही उपयोग तभी सार्थक है, जब उससे परिवार के साथ समाज का भी कल्याण हो।
इस दीपावली किसी जरूरतमंद के घर मिठाई पहुंचाएं, किसी गरीब बच्चे की शिक्षा में मदद करें, किसी बुजुर्ग के चेहरे पर मुस्कान लाएं और उन लोगों के साथ खुशियां बांटें, जिनके जीवन में अभाव है।
यही दीपावली की सच्ची भावना है।
दीपावली 2026: महत्वपूर्ण तिथियां
- धनतेरस : 6 नवंबर 2026
- नरक चतुर्दशी : 8 नवंबर 2026
- दीपावली एवं लक्ष्मी पूजन : 8 नवंबर 2026
- गोवर्धन पूजा : 10 नवंबर 2026
- भाई दूज : 11 नवंबर 2026
निष्कर्ष

दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन पूरी श्रद्धा, स्वच्छता और विधि-विधान के साथ करें। मुरादाबाद में गृहस्थ और व्यापारी परिवारों के लिए शाम 5:48 से 7:43 बजे तक का समय मुख्य लक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त बताया गया है।
इस पावन अवसर पर मां लक्ष्मी सभी के घरों में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि प्रदान करें, यही मंगलकामना है।
लव इंडिया नेशनल की ओर से समस्त देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
