World Consumer Day Special Article: सुरक्षित उत्पाद, आश्वस्त उपभोक्ता की दिशा में बढ़ते कदम

World Consumer Day Special Article: आज के दौर में बाजार का विस्तार जितनी तेजी से हुआ है, उतनी ही तेजी से उपभोक्ताओं के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हुई हैं। मिलावटखोरी, जमाखोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और भ्रामक विज्ञापनों के कारण उपभोक्ताओं का शोषण लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि सरकारों और समाज को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि उपभोक्ताओं को इन समस्याओं से कैसे सुरक्षित रखा जाए।

हर वर्ष 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष इसकी थीम “सुरक्षित उत्पाद, आश्वस्त उपभोक्ता” (Safe Products, Confident Consumers) रखी गई है। इस थीम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध कराना तथा जिम्मेदार उपभोक्ता व्यवहार को बढ़ावा देना है।

उपभोक्ता संरक्षण कानून का महत्व


भारत में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 लागू किया गया था। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को गलत व्यापारिक प्रथाओं, धोखाधड़ी, अत्यधिक कीमतों और गलत जानकारी से बचाना था।
समय के साथ उपभोक्ता बाजार में बड़े बदलाव आए। इसलिए वर्ष 2019 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में संशोधन कर नया कानून लागू किया गया। इस संशोधन के बाद उपभोक्ताओं को अधिक सशक्त अधिकार मिले और ऑनलाइन व्यापार, ई-कॉमर्स और भ्रामक विज्ञापनों पर भी नियंत्रण के प्रावधान किए गए।
अब उपभोक्ताओं को यह अधिकार है कि वे अपने अधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यापारी या कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार


उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। किसी भी वस्तु या सेवा को खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, कीमत और कंपनी की विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए।
खरीदारी के बाद बिल या रसीद अवश्य सुरक्षित रखें, क्योंकि किसी विवाद की स्थिति में यही सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण होता है।
साथ ही सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि बाजार में बिकने वाले उत्पाद सुरक्षित और मानकों के अनुरूप हों, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार का नुकसान न हो।

उपभोक्ताओं के मुख्य अधिकार


उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उपभोक्ताओं को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं—
सुरक्षा का अधिकार – हानिकारक वस्तुओं और सेवाओं से सुरक्षा
सूचना का अधिकार – उत्पाद की गुणवत्ता, मात्रा, कीमत और उपयोग की जानकारी
चयन का अधिकार – विभिन्न विकल्पों में से उचित वस्तु चुनने की स्वतंत्रता
प्रतिनिधित्व का अधिकार – उपभोक्ता मंचों में अपनी बात रखने का अधिकार
उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार – अपने अधिकारों के बारे में जानकारी प्राप्त करना
हालांकि इन अधिकारों के बावजूद जागरूकता की कमी के कारण कई उपभोक्ता अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते।

लक्ष्य वास्तव में हासिल किया जा सकेगा

विश्व उपभोक्ता दिवस केवल एक दिवस नहीं बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। जब उपभोक्ता जागरूक होंगे और सरकारें भी उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगी, तभी “सुरक्षित उत्पाद और आश्वस्त उपभोक्ता” का लक्ष्य वास्तव में हासिल किया जा सकेगा।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लाकर उपभोक्ताओं की शक्तियों को बढ़ाने का प्रयास किया लेकिन केंद्र के प्रयास जमीनी हकीकत नहीं बन पाए, नियुक्तियों में देरी, जवाबदेही का अभाव, समय पर न्याय न मिलने, उपभोक्ता मामलों में प्रशासनिक उदासीनता, मंडल स्तर पर राज्य आयोग की सर्किट बेंच की मांग ठंडे बस्ते डालने के कारण उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है साक्षरता की तर्ज पर उपभोक्ता आंदोलन को मजबूत किया जाए,जिला उपभोक्ता परिषदों का तत्काल गठन हो।

देवेंद्र वार्ष्णेय (उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता/ जिलाध्यक्ष) अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत मेरठ प्रांत संभल

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