टीएमयू में मेडिकल के पीजी स्टुडेंट्स को समझाए एथिक्स

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से एमडी और एमएस के स्टुडेंट्स को गहनता से समझाईं क्लिनिकल स्किल्स, मेडिकल एथिक्स, रिसर्च और अस्पताल की वर्किंग

लव इंडिया मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से न्यू लेक्चर थियेटर-2 में एमडी और एमएस सत्र 2025-26 के नव-प्रवेशित पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों के लिए छह दिनी ओरिएंटेशन प्रोग्राम हुआ।

29 मई से शुरू होकर दो चरणों में 29-30 मई और 3 से 6 जून तक चले इस अकादमिक कार्यक्रम का उद्देश्य नए रेजीडेंट डॉक्टरों को क्लिनिकल स्किल्स, मेडिकल एथिक्स, रिसर्च और अस्पताल की कार्यप्रणाली से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम में मेडिकल एथिक्स, मरीज की गोपनीयता, रिसर्च डिजाइन, बायो-मेडिकल वेस्ट और मेडिकोलीगल मामलों पर भी वक्ताओं ने विस्तार से चर्चा की। इससे पूर्व ओरिएंटेशन प्रोग्राम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के संग हुआ।

इस मौके पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. एनके सिंह, फैकल्टी ऑफ मेडिकल साइंसेज़ के डीन डॉ. एसके जैन, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट मेजर जनरल डॉ. सीके जखमोला, एडिशनल मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. वीके सिंह, पैथोलॉजी विभाग की एचओडी प्रो. सीमा अवस्थी, मेडिकल रिसर्च कमेटी के चेयरमैन प्रो. राजुल रस्तोगी, ऑर्थोपेडिक्स के हेड प्रो. अमित सराफ, कम्युनिटी मेडिसिन की एचओडी प्रो. सपना सिंह, मेडिकल डिप्टी सुपरिटेंडेंट प्रो. विनम्र तिवारी, फॉरेंसिक विभाग के एचओडी डॉ. प्रमोद दोडे आदि मौजूद रहे।

ख़ास बातें
निदेशक प्रशासन श्री अभिषेक कपूर ने उम्मीद जताई, ये स्टुडेंट्स जूनियर्स के लिए अनुकरणीय बनेंगे
प्रिंसिपल प्रो. एनके सिंह ने समझाया कम्युनिकेशन स्किल्स का महत्व
डॉ. साधना सिंह ने विशेष मेडिटेशन सत्रों में निभाई सहभागिता
प्रो. सीमा अवस्थी का स्वायत्तता, डॉ. संजीव चिंचोली का गोपनीयता पर व्याख्यान
लैब और रेडियोलॉजी के मांग पत्र त्रुटिहीन तरीके से भरने की भी ट्रेनिंग
एथिक्स के संग-संग इन्फॉर्म्ड कंसेंट के विस्तार से बताए कानूनी पक्ष

इन्होंने विभिन्न सत्रों में नए पीजी स्टुडेंट्स का वेलकम करते हुए चिकित्सा क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया। दूसरी ओर टीएमयू के निदेशक प्रशासन श्री अभिषेक कपूर ने मेडिकल के नए पीजी स्टुडेंट्स को मंगलकामनाएं प्रेषित करते हुए उम्मीद जताई, वे न केवल मेडिकल कॉलेज के मानकों पर खरे उतरेंगे, बल्कि अपने जूनियर्स के लिए भी अनुकरणीय बनेंगे।

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. एनके सिंह ने डॉक्टरों के जीवन में कम्युनिकेशन स्किल्स के महत्व पर जोर देते हुए कहा, मरीजों और उनके परिजनों के साथ सही संवाद आधे से ज्यादा तनाव को दूर कर देता है। प्रारम्भ तीन दिनों में हर सत्र के अंत में डॉ. साधना सिंह की ओर से मानसिक शांति और फोकस बढ़ाने के लिए विशेष मेडिटेशन सत्र भी आयोजित किए गए।

प्रो. सीमा अवस्थी ने मरीज की स्वायत्तता और डॉ. संजीव चिंचोली ने मरीज की गोपनीयता पर व्याख्यान दिया। इसके साथ ही डॉक्टरों को सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन, मेडिकल रिकॉर्ड्स की सही डॉक्युमेंटेशन और इमरजेंसी कोड्स के बारे में सिखाया गया। डॉ. मनप्रीत कौर तेहलिया और डॉ. विजय प्रताप सिंह ने क्रमशः मेडिकल एथिक्स और इन्फॉर्म्ड कंसेंट के कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला। डॉक्टरों को लैब और रेडियोलॉजी के मांग पत्र त्रुटिहीन तरीके से भरने की ट्रेनिंग भी दी गई ताकि इलाज में कोई देरी न हो।

डॉ. अजय कुमार ने मरीजों के साथ बेडसाइड शिष्टाचार और क्लिनिकल परीक्षण की बारीकियों को समझाया। डॉ. साधना सिंह और डॉ. प्रोबल चटर्जी ने बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन और विसंक्रमण जैसी बुनियादी मगर बेहद संवेदनशील प्रक्रियाओं की जानकारी दी। फार्माकोलोजी के एचओडी प्रो. प्रीथपाल सिंह मटरेजा ने फार्माकोविजिलेंस और पर्चा लिखने के सही तरीकों पर विस्तार से चर्चा की।

मेडिकल रिसर्च और कानूनी मामलों पर कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की अध्यक्षा डॉ. साधना सिंह और डॉ. श्रुति चंदक के मार्गदर्शन में नए डॉक्टरों को चिकित्सा अनुसंधान, हाइपोथिसिस तैयार करने और डेटा एनालिसिस की ट्रेनिंग दी गई। अंतिम दिन फोरेंसिक मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद दोडे और डिप्टी एमएस डॉ. विनम्र तिवारी ने मेडिकोलीगल केस को संभालने का एक व्यापक और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जो किसी भी टर्शियरी केयर अस्पताल के डॉक्टर के लिए जानना अत्यंत आवश्यक है।

error: Content is protected !!