लव इंडिया, मुरादाबाद। टिमिट – कॉलेज ऑफ़ मैनेजमेंट द्वारा तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू) के ऑडिटोरियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन के अंतर्गत शनिवार को एक प्रभावशाली पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों से आए शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों ने शिक्षा, शोध और करियर विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः पंजीकरण और नाश्ते के साथ हुई, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत एवं तिलक किया गया। दीप प्रज्वलन, सांस्कृतिक प्रस्तुति और मंच गठन के बाद औपचारिक सत्र प्रारंभ हुआ।स्वागत भाषण में प्रोफेसर विपिन जैन, डीन, फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट, टिमिट, मुरादाबाद ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के सभी 17 पॉइंट से शोध पत्र प्रस्तुत और प्रकाशित किए गए हैं।

उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इनमें से काफी अधिक शोध पत्र विद्यार्थियों द्वारा लिखे गए हैं, जो शोध के प्रति छात्रों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इन शोध पत्रों को 10 कॉन्फ्रेंस एडिटेड पुस्तकों के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है, जिनमें से एक पुस्तक का विमोचन कल और दूसरी पुस्तक का विमोचन आज किया गया। बाकी पुस्तके भी जल्द ही प्रकाशित की जाए।
पैनल डिस्कशन सत्र में प्रोफेसर तरुण कुमार शर्मा, डीन, शोभित विश्वविद्यालय, मेरठ ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप बनाना आवश्यक है, ताकि छात्र रोजगार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। प्रोफेसर दिव्या, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, शोभित विश्वविद्यालय, मेरठ ने विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए मेंटरशिप और छात्र कल्याण को प्राथमिकता देने की बात कही।डॉ. प्रणव कर्बंदा, करियर एवं लीडरशिप कोच, स्टुडिनेक्स सर्विसेज, नई दिल्ली ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में स्किल डेवलपमेंट, कम्युनिकेशन और लीडरशिप क्वालिटी करियर निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।

डॉ. मनीष श्रीवास्तव, निदेशक, क्वांटम यूनिवर्सिटी, रूड़की ने उच्च शिक्षा में नवाचार और रिसर्च कल्चर को बढ़ावा देने पर जोर दिया। डॉ. राजकुमार सिंह, प्रोफेसर, ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, देहरादून ने तकनीकी आधारित शिक्षा को समय की आवश्यकता बताते हुए डिजिटल लर्निंग के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. राधेश्याम झा, प्रोफेसर, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी, देहरादून ने अकादमिक उत्कृष्टता के लिए शोध आधारित दृष्टिकोण को अनिवार्य बताया। वहीं डॉ. पुलकित अग्रवाल, डीन, सूरजमल यूनिवर्सिटी, किच्छा ने प्रबंधन शिक्षा में प्रैक्टिकल एक्सपोजर और इंडस्ट्री इंटरफेस को महत्वपूर्ण बताया।
इस सत्र का संचालन प्रोफेसर विपिन जैन ने कॉन्फ्रेंस डायरेक्टर के रूप में किया।

इसके अतिरिक्त डॉ. पूजा व्यास, निदेशक, आईसीपीआर, नई दिल्ली ने भी अपने विचार साझा करते हुए नीति निर्माण में शोध की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।इस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिनमें थीसिस प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता, केस स्टडी प्रतियोगिता,पोस्टर प्रतियोगिता तथा बेस्ट रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन अवार्ड शामिल रहे।
इन प्रतियोगिताओं में छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी रचनात्मकता, विश्लेषण क्षमता एवं शोध कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिससे कार्यक्रम में प्रतिस्पर्धात्मक और नवाचारपूर्ण वातावरण देखने को मिला और विद्यार्थियों को प्राइज भी दिए गए।

इस अवसर पर टीएमयू के वाइस चांसलर श्री वी.के. जैन ने अपने संबोधन में कॉन्फ्रेंस को सफल आयोजन बताते हुए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंच ज्ञान के आदान-प्रदान और नवाचार को बढ़ावा देते हैं। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में आए हुए डेलिगेट्स को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय की एलुमनाई तानिया गुप्ता को सम्मानित किया गया, जिन्होंने “गोमाया काला” (https:www.gaumayakala.com) नामक कंपनी की स्थापना कर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के तहत गाय के गोबर से विभिन्न उत्पाद बनाकर पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया है।अंत में धन्यवाद ज्ञापन और स्मृति चिन्ह वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह कॉन्फ्रेंस छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों के लिए प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक साबित हुई।
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