लालबाग के श्री काली माता मंदिर महंत विवाद पहुंचा अदालत: महंत रामगिरि ने हटाए जाने को बताया फर्जी, 7 मई को सुनवाई

लव इंडिया, मुरादाबाद। महानगर के लालबाग स्थित श्री काली माता मंदिर (श्री सिद्ध पीठ नौ देवी मंदिर) के महंत को हटाने का मामला अब सड़कों से निकलकर अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। पद से हटाए गए महंत रामगिरि ने इस पूरे प्रकरण को मुरादाबाद की सिविल जज (सीडी) अदालत में चुनौती दी है। मामले की अगली सुनवाई 7 मई को निर्धारित की गई है।


महंत रामगिरि ने अपने अधिवक्ता राकेश जौहरी के माध्यम से दायर दीवानी वाद में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, बड़ा हनुमान घाट काशी बनारस के महंत सभापति मोहन भारती, हरिद्वार के महंत हरि गिरि, महाकाल गिरी महाराज और महंत हितेश्वर गिरी महाराज को पक्षकार बनाया है।


वाद में आरोप लगाया गया है कि 8 अप्रैल को जारी किया गया कथित पत्र, जिसके आधार पर महंत रामगिरि को पद से हटाने की बात कही गई, वह फर्जी और दुर्भावनापूर्ण है। यह पत्र सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित कर महंत के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया गया।


वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश जौहरी ने अदालत में कहा कि जिस पत्र के आधार पर महाकाल गिरी और हितेश्वर गिरी की नियुक्ति दिखाई गई है, वह पूरी तरह गैरकानूनी है और इसका महंत रामगिरि के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।


उन्होंने यह भी बताया कि श्री काली माता मंदिर श्री सिद्ध पीठ नौ देवी लगभग 400 वर्ष पुराना मठ है, जिसकी स्थापना नागा स्वामी श्री मिश्री गिरिराज जी द्वारा की गई थी। इस मठ में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत ही महंत का चयन होता है, जिसमें गुरु के बाद उनका शिष्य ही उत्तराधिकारी बनता है।


दावे में यह भी कहा गया है कि यह मंदिर पंचदशनाम जूना अखाड़ा, बड़ा हनुमान घाट, काशी बनारस से सम्बद्ध है और वहां से इस तरह का कोई निर्देश जारी नहीं किया गया। ऐसे में 8 अप्रैल को जारी कथित नियुक्ति पत्र को फर्जी बताया गया है।


करीब सात पृष्ठों के इस वाद में अदालत से न्याय की मांग की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश जौहरी और महंत रामगिरि ने संयुक्त रूप से पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। अब इस मामले पर सभी की नजरें 7 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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