शीतला अष्टमी कल: जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, बसौड़ा क्यों कहते हैं और क्या है इसका महत्व

मुरादाबाद/धर्म। होली के कुछ दिन बाद आने वाला शीतला अष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह दिन माता शीतला की पूजा के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि मां शीतला की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और बच्चों को रोगों से रक्षा मिलती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। कई राज्यों में इस पर्व को बसौड़ा या बसोड़ा भी कहा जाता है। इस दिन की खास परंपरा यह है कि घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन माता को भोग लगाया जाता है।


📅 कब है शीतला अष्टमी


साल 2026 में शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च, बुधवार को रखा जाएगा।
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 11 मार्च, रात 01:54 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 12 मार्च, सुबह 04:19 बजे
पूजा का शुभ समय: सुबह 06:36 बजे से शाम 06:27 बजे तक


🪔 क्यों कहा जाता है बसौड़ा


शीतला अष्टमी को कई राज्यों में बसौड़ा कहा जाता है।
बसौड़ा शब्द का अर्थ होता है बासी या ठंडा भोजन।
इस दिन माता शीतला को ठंडा भोजन चढ़ाने की परंपरा है, इसलिए इस पर्व को बसौड़ा कहा जाने लगा।


📖 बासी भोजन चढ़ाने की धार्मिक मान्यता


धार्मिक कथाओं के अनुसार एक बार किसी गांव में लोगों ने माता शीतला को गर्म भोजन अर्पित कर दिया, जिससे उनका मुंह जल गया और वे क्रोधित हो गईं।
कहा जाता है कि उसी समय एक वृद्ध महिला ने उन्हें ठंडा भोजन अर्पित किया, जिससे माता प्रसन्न हो गईं और उसका घर सुरक्षित रहा। तभी से माता को ठंडा या बासी भोजन चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।


🌦 मौसम से जुड़ा वैज्ञानिक कारण


शीतला अष्टमी के पीछे एक व्यावहारिक कारण भी माना जाता है। यह समय मौसम बदलने का होता है, जब ठंड खत्म होकर गर्मी की शुरुआत होती है।
पुराने समय में माना जाता था कि इस दिन के बाद बासी भोजन से बचना चाहिए, क्योंकि बदलते मौसम में इससे बीमारियां फैल सकती हैं। इसलिए इसे ताजा भोजन शुरू करने का संकेत भी माना जाता है।


🪔 शीतला अष्टमी की पूजा विधि

  • पूजा का भोजन एक दिन पहले यानी सप्तमी की रात को बना लिया जाता है।
  • सुबह स्नान करके माता शीतला की पूजा की जाती है।
  • माता को मीठे चावल, पूड़ी, पुए, राबड़ी या अन्य ठंडे व्यंजन का भोग लगाया जाता है।
  • पूजा के समय शीतला माता की कथा सुनना और शीतलाष्टक का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • पूजा के बाद वही भोजन प्रसाद के रूप में पूरे परिवार में बांटा जाता है।

  • 🙏 शीतला माता की पूजा का महत्व
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शीतला को आरोग्य की देवी माना जाता है। उनकी पूजा करने से चेचक, खसरा और त्वचा से जुड़ी बीमारियों से रक्षा होने की मान्यता है।
    यह व्रत परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और बच्चों की लंबी उम्र के लिए भी किया जाता है।

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