संभल के उपभोक्ता की शिकायत पर फैसला, बैंक ऑफ इंडिया को अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी माना गया

लव इंडिया, संभल। रोजगार के लिए लिए गए ऋण पर सब्सिडी का लाभ न देना बैंक ऑफ इंडिया को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग, संभल ने बैंक को ₹1 लाख 75 हजार की सब्सिडी राशि ब्याज और क्षतिपूर्ति सहित अदा करने का आदेश दिया है।
यह मामला संभल के गांव अख्तियारपुर टिल्लूपुरा निवासी रिंकू (पुत्र सीताराम) से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2020 में रोजगार शुरू करने के उद्देश्य से Bank of India की आर्य समाज रोड शाखा में ऋण के लिए आवेदन किया था।
💼 क्या है पूरा मामला

उपभोक्ता ने ₹5 लाख ऋण के लिए आवेदन किया। बैंक ने ₹4.75 लाख का ऋण स्वीकृत किया। योजना के तहत ₹1.75 लाख की सब्सिडी का प्रावधान था खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा उपभोक्ता ने ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया और समय-समय पर किस्तें जमा करता रहा, लेकिन बैंक ने सब्सिडी राशि खाते में समायोजित नहीं की।
⚖️ वसूली नोटिस से बढ़ी परेशानी
सब्सिडी न देने के बावजूद बैंक ने उपभोक्ता पर ₹3.89 लाख बकाया दिखाते हुए वसूली प्रमाणपत्र जारी कर दिया, जिससे परेशान होकर उपभोक्ता ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
🧑⚖️ आयोग में क्या हुआ

उपभोक्ता के अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय ने आयोग में तर्क रखा कि सब्सिडी का लाभ नियमों के अनुसार मिलना चाहिए था
बैंक ने जानबूझकर राशि समायोजित नहीं की। बैंक की ओर से दलील दी गई कि सब्सिडी राशि रिजर्व फंड में रखी जाती है और कुछ शर्तों के अनुसार ही जारी होती है।
📜 आयोग का फैसला
जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि बैंक ने केंद्र सरकार (MSME/खादी आयोग) की अधिसूचना का पालन नहीं किया। सब्सिडी राशि उपभोक्ता के खाते में न डालना अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) है।
💰 क्या आदेश दिया गया

आयोग ने बैंक को निर्देश दिया कि ₹1,75,000 (सब्सिडी राशि) उपभोक्ता के खाते में जमा करें। ₹15,000 क्षतिपूर्ति और वाद व्यय दें। 2 माह के भीतर भुगतान करें अन्यथा 9% वार्षिक ब्याज देना होगा।
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