तालाबों पर दूसरे समुदाय को पट्टा देने के विरोध में सिंघाड़िया बिरादरी का प्रदर्शन, आजीविका बचाने की उठाई मांग


मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन, पुश्तैनी अधिकार और रोजगार की रक्षा के लिए सरकार से हस्तक्षेप की अपील


मुरादाबाद। बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, अमरोहा और संभल जिलों से पहुंचे सिंघाड़िया बिरादरी के लोगों ने सोमवार को मंडलायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन कर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा गांवों के तालाबों पर दूसरे समुदाय के लोगों को पट्टा दिए जाने से सिंघाड़ा उत्पादन से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सिंघाड़िया बिरादरी सदियों से तालाबों में सिंघाड़ा उत्पादन कर अपना जीवनयापन करती आ रही है। उनके अनुसार, राजस्व अभिलेखों में वर्ष 1359 फसली से उनके नाम दर्ज हैं और यह उनका पारंपरिक व्यवसाय है। उन्होंने कहा कि सिंघाड़िया समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल है तथा उसकी आबादी लगभग 12 लाख बताई जाती है।


ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि राजस्व अधिकारियों द्वारा तालाबों को सरकारी संपत्ति बताते हुए ग्राम सभा के नाम दर्ज किया जा रहा है और लंबे समय से आजीविका चला रहे लोगों को बेदखल किया जा रहा है। इससे पूरे समुदाय के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद-21 (जीवन और आजीविका के अधिकार) तथा अनुच्छेद-46 (पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा) की भावना के विपरीत है। उन्होंने मांग की कि सिंघाड़िया बिरादरी को उसके पुश्तैनी व्यवसाय से वंचित न किया जाए, वर्ष 1359 फसली से चले आ रहे राजस्व अभिलेखों को आधार मानते हुए बेदखली की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए तथा समुदाय की पारंपरिक आजीविका और अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।


प्रदर्शन में राष्ट्रीय अध्यक्ष रोशन लाल, मदन सिंह, प्रधान सोमपाल, मनोहर सिंह, मनोज कुमार गौतम, काजल, शारदा देवी, अनिल कुमार तोमर, रामनाथ तोमर, छोटन सिंह, पवन कुमार, परविंदर, बाबू राम, तुला राम, संदीप सहित बड़ी संख्या में सिंघाड़िया बिरादरी के लोग मौजूद रहे।

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