पुलिस की मौजूदगी में उड़ती रहीं ट्रैफिक नियमों की धज्जियां, परशुराम जयंती रैली में दिखा लापरवाह नजारा

लव इंडिया, मुरादाबाद। परशुराम जयंती के अवसर पर कंपनी बाग से दिल्ली रोड स्थित परशुराम चौक तक निकाली गई बाइक रैली जहां एक ओर उत्साह का प्रतीक बनी, वहीं दूसरी ओर यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी भी सामने आई।


रैली के दौरान कई कारों में युवक छत पर खड़े होकर और दरवाजों से लटककर यात्रा करते नजर आए। हैरानी की बात यह रही कि यह सब पुलिस की मौजूदगी में होता रहा, लेकिन कहीं भी सख्ती या रोक-टोक नजर नहीं आई।


तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि युवक चलती गाड़ियों की छत पर खड़े होकर स्टंट जैसी स्थिति बना रहे हैं, जो न सिर्फ उनकी खुद की जान के लिए खतरा है बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों के लिए भी जोखिम पैदा करता है।

🚨 जिम्मेदारी पर उठे सवाल


सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि यदि इस दौरान कोई हादसा हो जाता, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती? क्या पुलिस की मौजूदगी में ऐसे खतरनाक कृत्यों को नजरअंदाज करना सही है?

🚗 जाम से आम जनता परेशान


रैली के चलते दिल्ली रोड और खासकर लोकोशेड पुल पर लंबा जाम लग गया। घंटों तक वाहन फंसे रहे। ऑफिस जाने वाले और आम नागरिकों को भारी परेशानी हुई। एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका बनी रही।


⚖️ नियम बनाम लापरवाही


यातायात नियम स्पष्ट रूप से चलती गाड़ी की छत पर खड़े होने या खतरनाक तरीके से यात्रा करने को प्रतिबंधित करते हैं। इसके बावजूद खुलेआम उल्लंघन होना प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े करता है।

🧾 आयोजनों में सुरक्षा- व्यवस्था दोनों को प्राथमिकता दी जाए


त्योहार और धार्मिक आयोजन समाज की एकता और उत्साह के प्रतीक होते हैं, लेकिन इनके नाम पर नियमों की अनदेखी और आम जनता को परेशानी में डालना कहीं न कहीं सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है। जरूरत है कि ऐसे आयोजनों में सुरक्षा और व्यवस्था दोनों को प्राथमिकता दी जाए।

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