संभल के उपभोक्ता की रकम दबाने का मामला, जिला उपभोक्ता आयोग मुरादाबाद ने बैंक को फटकारते हुए ब्याज व क्षतिपूर्ति सहित भुगतान के निर्देश दिए
लव इंडिया, संभल/मुरादाबाद। बैंकों में गड़बड़ियों के मामले लगातार सामने आते रहे हैं, लेकिन संभल जिले के ग्राम बाराही से सामने आया यह मामला चौंकाने वाला है। यहां एक उपभोक्ता से एफडी के नाम पर 5 लाख रुपये लेकर बैंक द्वारा न केवल रसीद जारी की गई, बल्कि बाद में उसी एफडी को सिस्टम में दर्ज ही नहीं किया गया। जब उपभोक्ता ने परिपक्वता पर रकम मांगी तो बैंक ने भुगतान से इंकार कर दिया। मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा, जहां से उपभोक्ता के पक्ष में बड़ा फैसला आया।
ग्राम बाराही, जिला संभल निवासी रामौतार ने 18 जुलाई 2022 को उत्तर प्रदेश प्रथमा बैंक की शाखा बाराही में 5 लाख रुपये की सावधि जमा (एफडी) बनवाई थी। बताया गया कि बैंक मैनेजर ने रकम प्राप्त कर एफडी रसीद जारी की, जिस पर खाता संख्या भी अंकित थी। इतना ही नहीं, इस एफडी का दो बार नवीनीकरण भी किया गया।
लेकिन 1 अप्रैल 2023 को जब उपभोक्ता ने अपनी जमा राशि ब्याज सहित वापस मांगी, तो बैंक अधिकारियों ने यह कहकर भुगतान से इंकार कर दिया कि इस एफडी का कोई रिकॉर्ड बैंक के सिस्टम में मौजूद नहीं है।
पीड़ित ने बैंक के उच्च अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग मुरादाबाद में वाद दायर किया।
⚖️ Bank का पक्ष : एफडी रसीद बैंक के सिस्टम में दर्ज नहीं
बैंक की ओर से आयोग में यह दलील दी गई कि प्रस्तुत एफडी रसीद बैंक के सिस्टम में दर्ज नहीं है और बैंक ने ऐसी कोई रसीद जारी नहीं की। हालांकि रसीद पर शाखा प्रबंधक के हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की गई। बैंक का कहना था कि संबंधित शाखा प्रबंधक द्वारा स्टेशनरी का दुरुपयोग किया गया और उनका निधन हो चुका है, इसलिए बैंक इस भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं है।
🧑⚖️ Advocate पारस वार्ष्णेय का तर्क
लापरवाही के कारण उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता पारस वार्ष्णेय ने तर्क दिया कि जब बैंक द्वारा धनराशि प्राप्त कर एफडी रसीद जारी की गई, तो उस धनराशि का रिकॉर्ड सिस्टम में दर्ज करना बैंक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बैंक की लापरवाही के कारण उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, जिसके लिए बैंक जिम्मेदार है।
🏛️ आयोग का फैसला
जिला उपभोक्ता आयोग प्रथम मुरादाबाद ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि एफडी रसीद बैंक से ही जारी हुई है और रिकॉर्ड दर्ज न करना बैंक की लापरवाही है। आयोग ने आदेश दिया कि बैंक 5 लाख रुपये उपभोक्ता को लौटाए। 10% वार्षिक ब्याज भी दे। 10,000 रुपये क्षतिपूर्ति और 5,000 रुपये वाद व्यय दें।
⚠️ क्या सीख मिलती है…
बैंकिंग लेन-देन का रिकॉर्ड रखना जरूरी। केवल रसीद ही नहीं, सिस्टम एंट्री भी जरूरी। उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग मजबूत माध्यम।