टीएमयू में धरती पुत्रों ने समझी फार्मिंग की एडवांस टेक्निक्स

लव इंडिया,मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज के एग्रीकल्चर रिसर्च फार्म का संभल जिले के किसानों ने शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान काश्तकारों ने गन्ने की वैज्ञानिक खेती और रबी के मौसम में उगाई जाने वाली विभिन्न सब्जियों की उन्नत उत्पादन तकनीकों को समझा।

कॉलेज के डीन प्रो. प्रवीण कुमार जैन का कहना है, इस भ्रमण का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से परिचित कराना और फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना रहा। डीन प्रो. जैन ने कहा, कृषि रिसर्च फार्म के ऐसे शैक्षणिक भ्रमण किसानों को नई तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी देने और उन्हें आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के तीर्थंकर महावीर कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज की ओर से गन्ने और सब्जियों की वैज्ञानिक खेती से रूबरू हुए सम्भल जनपद के कृषिपुत्र

उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण, उन्नत बीजों के उपयोग, संतुलित पोषण, जल संरक्षण और समेकित कीट प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। धरतीपुत्रों ने कृषि फार्म पर उगाई जा रही विभिन्न फसलों और सब्जियों का अवलोकन भी किया। इस दौरान कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस के कृषि वैज्ञानिक प्रो. बलराज सिंह ने खेत पर ही उनकी समस्याओं को सुना और फसल उत्पादन से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान किया। काश्तकारों ने उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, फसल प्रबंधन एवम् कीट एवम् रोग नियंत्रण से संबंधित सवाल पूछे और विशेषज्ञों से व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त किया।

कृषि वैज्ञानिक प्रो. सिंह ने किसानों को उन्नत किस्मों के चयन, खेत की तैयारी, स्वस्थ बीज के प्रयोग, बीज उपचार, आधुनिक बुवाई विधियों, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, कीट एवम् रोगों से बचाव के उपायों की जानकारी देते हुए बताया, वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर गन्ने की उपज और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। प्रो. सिंह ने आलू, मटर, टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी और मूली सरीखी प्रमुख रबी सब्जियों की खेती की तकनीकों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने किसानों को उचित बुवाई समय, गुणवत्तापूर्ण बीज एवम् पौध सामग्री का चयन, पौधों के बीच सही दूरी, पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग, जल संरक्षण और फसल सुरक्षा के संबंध में उपयोगी सुझाव दिए। उन्होंने कहा, आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसान उत्पादन लागत कम करने के साथ बेहतर गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त कर सकते हैं। फैकल्टी डॉ. सुनील कुमार ने किसानों से संवाद करते हुए उन्हें पारंपरिक खेती के साथ नवीन एवम् वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा, कृषि शिक्षण संस्थानों और किसानों के बीच नियमित संवाद से कृषि अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने में मदद मिलती है। भ्रमण में शामिल किसानों ने विजिट को ज्ञानवर्धक और उपयोगी बताते हुए विश्वविद्यालय एवम् कॉलेज के कृषि विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, यह पहल किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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