वृंदावन के प्राचीन श्री गोदा विहार मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीस्वामी शाश्वताचार्य जी महाराज के श्रीमुख से श्री पुरुषोत्तम मास- ज्येष्ठ में 24 मई से 30 मई तक मां नर्मदा के तट पर बहेगी श्रीमद् भागवत कथा
श्रीमद् भागवत कथा के ममर्ज्ञ एवम् वृंदावन के प्राचीन श्री गोदा विहार मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीस्वामी शाश्वताचार्य जी महाराज मध्य प्रदेश के अमरकंटक में मां नर्मदा के तट पर भक्तों को श्रीमद् भागवत कथा सुनाएंगे।

देश के सबसे कम आयु- करीब 18 वर्ष के कथा वाचक श्रीस्वामी शाश्वताचार्य जी श्री पुरुषोत्तम मास- ज्येष्ठ में 24 मई से 30 मई तक कथा का वाचन करेंगे। पीठाधीश्वर समेत मध्यप्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि राज्यों से श्रीमद् भागवत कथा में शामिल होने वाले भक्तों का अमरकंटक पहुंचने का सिलसिला जारी है।

उल्लेखनीय है, श्री गोदा विहार मंदिर- वैकुंठ धाम वृंदावन के अनोखे और भव्य मंदिरों में एक है । इसे साक्षात वैकुंठ का रूप माना जाता है यहां भगवान लक्ष्मीनारायण की अत्यंत विशाल और अद्भुत प्रतिमा स्थापित है। प्रमुख विशेषताओ में 33 कोटि देवी-देवता के अलावा मंदिर में लगभग 400 से अधिक मूर्तियां हैं, जिनमें सभी अवतार, ऋषि-मुनि, और देवी-देवता शामिल हैं।
पौराणिक वास्तुकला में निर्मित इस मंदिर के अलग-अलग हिस्से जैसे ब्रह्म लोक, रघुकुल लोक, और भागवत लोक हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथों और मान्यताओं को दर्शाते हैं। महाराजश्री ने बताया, कथा प्रतिदिन दोपहर 03 बजे से शाम 06 बजे तक होगी।

पीठाधीश्वर श्रीस्वामी शाश्वताचार्य जी महाराज अपनी कथाओं में प्रायः भक्तों से कहते हैं, सीखना है तो समुद्र से सीखो भाई। समुद्र किसी गुरु के पास नहीं गया। समुद्र ने कोई सतसंग नहीं सुना। समुद्र ने कोई माला नहीं फेरी। फिर भी हर बार अपनी गंदगी को खुद से बाहर कर देता है। बार-बार। बिना रुके। और हम? 108 माला फेरते हैं। चालीसा कंठस्थ है। मंदिर में सबसे आगे खड़े होते हैं, पर भीतर वही क्रोध है। वही ईर्ष्या है। वही झूठ है।

शास्त्र यही कहता है, जब तक मनुष्य अपने अंदर जाकर खुद को नहीं जानेगा, बाहर का कोई भी कर्मकांड उसे नहीं बदलेगा। साधक वह नहीं, जो सबसे ज्यादा भजन गाए। साधक वह है, जो अपनी अशुद्धियों को पहचाने। समझे। और त्यागे। समुद्र की तरह। वह अपने भक्तों को नेक सलाह देते हैं, आप एक काम करो। आज 5 मिनट बैठो। और खुद से पूछो, मेरे अंदर क्या है? जो मुझे प्रभु से दूर कर रहा है? वह एक चीज़ नीचे लिखो। ऐसा करके आप अपना आत्मनिरीक्षण करो।

उल्लेखनीय है, विभिन्न राज्यों में महाराजश्री की एक के बाद कथा तय है। आगरा के मुरली मनोहर मंदिर में 08 से 15 जून तक श्रीमद् भागवत कथा रस महोत्सव होगा। इसी प्रकार उत्तराखंड, दिल्ली आदि में भी कथा होंगी।