मुरादाबाद नगर निगम में महिला से मारपीट के आरोप का मामला: अधिकारी-कर्मचारी समेत 10 नामजदों को नोटिस, 28 सितंबर को जवाब



लव इंडिया, मुरादाबाद। नगर निगम परिसर में महिला से कथित मारपीट और अन्य आरोपों से जुड़े मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी है। मामले की वादिनी ठाकुर मंजू राठौर की ओर से दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में जिला एवं सत्र न्यायालय ने रिविजन स्वीकार किए जाने के बाद विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस का जवाब 28 सितंबर 2026 तक दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।


रिविजन में नगर निगम से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों समेत कुल 10 नामजद लोगों के नाम विपक्षी/आरोपित के तौर पर दर्ज हैं। इनमें प्रेम बाबू वाल्मीकि, ओमी लाल वाल्मीकि, उप नगर आयुक्त रामपाल, धर्मेंद्र मुल्तानी, गीता सक्सेना, नीरज पाल पाराशर, अनिल लक्कड़ी, मोहम्मद सुमन अली, नजीर सौरभ और मोहम्मद आशिक शामिल हैं। दस्तावेज में इनके अलावा 5-6 अज्ञात महिलाओं तथा करीब 50-60 अज्ञात लोगों का भी उल्लेख किया गया है।


27 अक्टूबर 2025 की घटना से जुड़ा है मामला


रिविजन याचिका के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2025 को मंजू राठौर के पति रामेश्वर दयाल तुरैहा नगर निगम कार्यालय में एक ज्ञापन देने गए थे। याचिका में कहा गया है कि वहां विवाद और कथित मारपीट की सूचना मिलने के बाद मंजू राठौर भी नगर निगम परिसर पहुंचीं।
वादिनी ने आरोप लगाया है कि वहां मौजूद लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ अभद्रता एवं मारपीट की। याचिका में जान से मारने की धमकी देने तथा उस समय मंजू राठौर के करीब चार माह की गर्भवती होने का भी उल्लेख है। आरोप है कि उनके पेट पर लात मारी गई।


गर्भपात और नकदी-जेवर ले जाने का भी आरोप


रिविजन में मंजू राठौर की ओर से आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद उनका गर्भपात हो गया। इसके अलावा नकदी और जेवर ले जाने, उनके पति की कार को क्षतिग्रस्त करने तथा टायर पंचर किए जाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।


CCTV और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की मांग


पुनरीक्षण याचिका में नगर निगम परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल से संबंधित दस्तावेज और स्वतंत्र गवाहों के बयान की जांच कराने की मांग की गई है।
वादिनी पक्ष का कहना है कि घटना स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी बताई गई है, इसलिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य स्वतंत्र साक्ष्यों से घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वाहन को हुए कथित नुकसान की भी जांच की मांग की गई है।


21 अगस्त के आदेश को दी गई चुनौती


रिविजन में उल्लेख किया गया है कि मुरादाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 21 अगस्त 2026 को संबंधित प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था। इसके बाद वादिनी की ओर से क्रिमिनल रिविजन संख्या 257/2026 दाखिल कर निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई।
वादिनी पक्ष ने अदालत से मांग की है कि पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए पुलिस को मुकदमा दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए जाएं।


28 सितंबर को आरोपित पक्ष का जवाब


जिला एवं सत्र न्यायालय में रिविजन स्वीकार होने के बाद नामजद पक्ष को नोटिस जारी किए गए हैं। अब 28 सितंबर 2026 तक उनका जवाब अदालत में आने की बात कही गई है। इसके बाद न्यायालय मामले में आगे की सुनवाई करेगा।


मंजू राठौर ने कहा- न्यायपालिका पर भरोसा


वादिनी ठाकुर मंजू राठौर, जो वर्तमान में भारतीय किसान यूनियन संविधान की मुरादाबाद मंडल अध्यक्ष हैं, का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उनका कहना है कि यदि जिला अदालत से उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो वह आगे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।


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