सील तोड़कर चल रहा था अस्पताल! शिकायत के बाद FIR दर्ज, डॉक्टरों पर केस

IGRS पोर्टल पर शिकायत के बाद खुला मामला, पहले सील फिर धड़ल्ले से संचालन—अब पुलिस कार्रवाई

लव इंडिया, मुरादाबाद/भगतपुर। मुरादाबाद में स्वास्थ्य नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का मामला सामने आया है, जहां एक अस्पताल को प्रशासन द्वारा सील किए जाने के बावजूद उसे दोबारा अवैध रूप से संचालित किया जाता रहा। शिकायत के बाद जांच हुई, सच्चाई सामने आई और अब आखिरकार संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई है।


पूरा मामला : अस्पताल संचालन की शिकायत IGRS पोर्टल पर की गई


मामला थाना भगतपुर क्षेत्र के ग्राम बिलाकुदान स्थित एक टीएनएस अस्पताल से जुड़ा है। यहां अवैध रूप से अस्पताल संचालन की शिकायत IGRS पोर्टल के माध्यम से की गई थी।


शिकायतकर्ता नदीम पुत्र अबरार हुसैन, निवासी ग्राम मेनाठेर, तहसील बिलारी, जनपद मुरादाबाद ने पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि अस्पताल बिना वैध अनुमति के संचालित किया जा रहा है।


शिकायत के आधार पर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने 19 मार्च 2026 को अस्पताल का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि अस्पताल पूर्व में सील किया जा चुका था, लेकिन इसके बावजूद संचालकों द्वारा सील तोड़कर दोबारा संचालन शुरू कर दिया गया था।

क्या मिली जांच में सच्चाई


– अस्पताल पहले से प्रशासन द्वारा सील किया गया था।
– संचालकों ने सील तोड़कर फिर से संचालन शुरू किया।
– बिना अनुमति अस्पताल चलाया जा रहा था।
– यह प्रशासनिक आदेशों की सीधी अवहेलना है।


किन पर दर्ज हुआ केस


पुलिस ने इस मामले में डॉ. गुलिस्ता परवीन और डॉ. इफ्तेखार के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

कौन सी धाराएं लगीं

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223(b) के तहत FIR दर्ज (सरकारी आदेश की अवहेलना / सील तोड़ने से जुड़ा अपराध)


प्रशासन का रुख


अधिकारियों के अनुसार यह मामला सिर्फ नियम उल्लंघन नहीं बल्कि कानून की खुली अवहेलना है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी सील तोड़कर अवैध गतिविधि न चला सके।

बड़ा सवाल- अगर अस्पताल सील था तो फिर कैसे चलता रहा?- किसकी निगरानी में यह सब हुआ?-क्या स्थानीय स्तर पर मिलीभगत थी?

प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर प्रश्न


यह मामला सिर्फ एक अस्पताल का नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है। शिकायत के बाद कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन सील तोड़कर अस्पताल चलना प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है।

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