मुरादाबाद में मजदूर-किसानों का शांति मार्च, मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाने को पुलिस से छीना- झपटी

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और SIR पर रोक लगाने की मांग

लव इंडिया, मुरादाबाद। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एवं जन संगठनों की समन्वय समिति के आह्वान पर मजदूरों, किसानों और खेत मजदूरों से जुड़े संगठनों के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को मुरादाबाद में शांति मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने और मतदाता सूची से कथित रूप से गलत तरीके से हटाए गए लोगों के नाम बहाल करने की मांग उठाई।

शांति मार्च स्थानीय डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क, सिविल लाइंस से शुरू होकर कचहरी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा। यहां प्रदर्शनकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में महिला प्रदर्शनकारियों और महिला पत्रकारों के साथ कथित अशोभनीय व्यवहार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी शामिल रही।

SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

किसान और मजदूर संगठनों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से की जा रही निर्वाचन और मताधिकार संबंधी कार्रवाइयों, विशेषकर SIR प्रक्रिया, पर सवाल उठ रहे हैं। उनका आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग के कामकाज के तरीके से उसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।

संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी भी पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की मौजूदा प्रक्रिया से लोकतांत्रिक व्यवस्था और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी जताई नाराजगी

संयुक्त बयान में संगठनों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के अधीन दिल्ली पुलिस विपक्षी दलों, नागरिक समाज संगठनों, छात्र संगठनों, किसानों और मजदूरों के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई कर रही है। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों और महिला पत्रकारों के साथ कथित अशोभनीय व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

ये आरोप प्रदर्शनकारी संगठनों की ओर से लगाए गए हैं। संबंधित घटनाओं और आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।

ज्ञापन में रखीं प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में मुख्य रूप से छह मांगें रखीं:

  1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए।
  2. SIR प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और मतदाता सूची से गलत तरीके से बाहर किए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं।
  3. निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता बहाल की जाए।
  4. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित मौजूदा कानून, 2023 को वापस लिया जाए।
  5. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करते हुए चयन समिति गठित की जाए।
  6. महिला प्रदर्शनकारियों और महिला पत्रकारों के साथ कथित अशोभनीय व्यवहार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

कार्यक्रम के संबंध में उत्तर प्रदेश किसान सभा, मुरादाबाद के जिला अध्यक्ष कासिम अली ने कहा कि संगठनों ने लोकतांत्रिक अधिकारों और मताधिकार की रक्षा के लिए अपनी मांगें प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति तक पहुंचाई हैं।

कई संगठनों के कार्यकर्ता रहे मौजूद

शांति मार्च और ज्ञापन सौंपने के दौरान कासिम अली, मुस्तलीव, शमशाद, मैराज, आसिम, दानिश, नाजिम, चमनआरा, महिपाल सिंह एडवोकेट, जागन सिंह, रोहिताश राजपूत, सीताराम, संतोष वर्मा, बहादुर अली, थान सिंह, चंद्रपाल सिंह आजाद, शरीफ अहमद, शहाबुद्दीन, तहजीब, गफ्फार हुसैन, रजा हुसैन, सुनील सक्सेना, भूकन सिंह, श्याम लाल, जुल्फीकार सैफी, राविक हुसैन, ताहिर अंसारी, डॉ. हनीफ पाशा, संजीव कुमार, सुशील बिश्नोई एडवोकेट, विक्रम सिंह एडवोकेट, याकूब सैफी, सुमित कुमार, डॉ. राजेंद्र परमार और डॉ. सीताराम सहित विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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