Karwa Chauth 2026: मुरादाबाद में रात 8 बजे के बाद दिखेगा चांद, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत खोलने का समय

लव इंडिया, मुरादाबाद। पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ आज, 29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ का पर्व श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से निर्जला व्रत रख रहीं महिलाओं को अब शाम की पूजा और चंद्र दर्शन का इंतजार है। मुरादाबाद में चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:04 से 8:10 बजे के बीच बताया जा रहा है। स्थानीय पंचांग के अनुसार, चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोला जाएगा।

करवा चौथ 2026: मुरादाबाद में आज के प्रमुख समय

  • करवा चौथ की तारीख: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:32 बजे से 6:49 बजे तक
  • अनुमानित चंद्रोदय: रात 8:04 से 8:10 बजे के बीच
  • चतुर्थी तिथि की समाप्ति: रात लगभग 10:09 बजे

चंद्रोदय के समय में अलग-अलग पंचांगों के बीच कुछ मिनटों का अंतर है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं स्थानीय पंचांग और वास्तविक चंद्र दर्शन को ध्यान में रखें।

क्यों रखा जाता है करवा चौथ का व्रत?

हिंदू परंपरा में करवा चौथ का विशेष महत्व है। विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं। परंपरागत रूप से व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद पूरा किया जाता है।

दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करती हैं। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है और चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य अर्पित किया जाता है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद खोला जाएगा व्रत

करवा चौथ की परंपरा के अनुसार, महिलाएं चंद्रमा को छलनी से देखकर पूजा करती हैं। इसके बाद पति के दर्शन करके उनके हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा है। परिवार और क्षेत्र की रीति के अनुसार पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है।

यदि आसमान में बादल होने के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता, तो व्रत खोलने के संबंध में अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय विद्वान की सलाह का पालन किया जा सकता है।

बाजारों में त्योहार की रौनक

करवा चौथ पर पूजा सामग्री, करवा, छलनी, दीपक, रोली, मिठाइयों और श्रृंगार के सामान की खरीदारी की जाती है। महिलाएं इस अवसर पर पारंपरिक परिधान और मेहंदी के साथ त्योहार मनाती हैं। शाम को घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना के आयोजन होते हैं।

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