लव इंडिया, नई दिल्ली। देश की बड़ी आईवियर कंपनी Lenskart इन दिनों एक बड़े विवाद में घिर गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित ड्रेस कोड दस्तावेज़ ने ऐसा विवाद खड़ा किया कि कंपनी को सफाई देनी पड़ी और बाद में अपनी पॉलिसी तक बदलनी पड़ी।
क्या है पूरा मामला

अप्रैल 2026 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक डॉक्यूमेंट वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि:कर्मचारियों को तिलक, बिंदी, कलावा, सिंदूर लगाने की अनुमति नहीं, जबकि हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति दी गई। इस कथित असमानता को लेकर सोशल मीडिया पर भारी विरोध शुरू हो गया और कंपनी पर धार्मिक भेदभाव के आरोप लगे।
सोशल मीडिया पर क्यों भड़का गुस्सा
यूजर्स ने इसे “डबल स्टैंडर्ड” बताया कि कई लोगों ने #BoycottLenskart ट्रेंड करायावीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल हुए। मामला भावनात्मक और धार्मिक होने के कारण कुछ ही घंटों में देशभर में ट्रेंड करने लगा।
कंपनी की सफाई: “डॉक्यूमेंट पुराना था

”लेंसकार्ट के फाउंडर Peyush Bansal ने सामने आकर कहा:वायरल डॉक्यूमेंट पुराना और गलत संदर्भ वाला है। यह कंपनी की मौजूदा HR पॉलिसी नहीं है। कंपनी किसी भी धार्मिक प्रतीक पर रोक नहीं लगाती। उन्होंने कहा कि “हमारी पॉलिसी में किसी भी धार्मिक पहचान पर कोई प्रतिबंध नहीं है।”
बड़ा U-Turn: कंपनी ने बदली पॉलिसी
विवाद बढ़ने के बाद कंपनी को अपनी नीति में बदलाव करना पड़ा। अब नई गाइडलाइन में बिंदी, तिलक, हिजाब, पगड़ी सभी की अनुमति “धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान” को सम्मान देने की बात कहीं है।
सिर्फ डॉक्यूमेंट नहीं, भरोसे का सवाल

हालांकि कंपनी ने सफाई दे दी, लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका।अब उठ रहे सवाल:क्या पहले सच में ऐसी पॉलिसी थी?क्या कंपनी ने दबाव में आकर फैसला बदला?क्या यह मामला कॉर्पोरेट सेक्टर में धार्मिक स्वतंत्रता का नया मुद्दा बनेगा?
देशभर में असर
सोशल मीडिया पर बहस तेजकई लोगों ने कंपनी के खिलाफ विरोध जताया। कुछ जगहों पर “बायकॉट” की मांग भी उठी। विवाद अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।
सोशल मीडिया की ताकत का बड़ा उदाहरण

लेंसकार्ट का यह विवाद सिर्फ एक वायरल डॉक्यूमेंट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कॉर्पोरेट नीतियों, धार्मिक स्वतंत्रता और सोशल मीडिया की ताकत का बड़ा उदाहरण बन गया है।
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