जब दो मासूम पुलिस चौकी पहुंचे और बोले इंचार्ज से, अंकल जी…

मुरादाबाद। शहर के जयंतीपुर क्षेत्र में एक मिसाल कायम करने वाली घटना सामने आई है जहाँ दो छोटे बच्चे अपनी ईमानदारी और जिम्मेदारी के चलते पुलिस के लिए गर्व का विषय बने। बच्चों ने एक खोया हुआ मोबाइल फोन तुरंत पुलिस चौकी पहुंचकर सौंप दिया। इस घटना ने न केवल पुलिस विभाग का बल्कि आम जनता का भी ध्यान बच्चों की ईमानदारी और साहस की ओर खींचा है।

मुरादाबाद के जयंतीपुर चौकी में यह घटना हुई, जहां दो बच्चे अचानक एक मोबाइल लेकर आये। बच्चों ने चौकी इंचार्ज प्रबोद सिंह को बताया कि यह मोबाइल उन्हें पीर के बाजार के आस-पास कहीं मिला है। बच्चों ने यह मोबाइल लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर से लेकर आकर पुलिस को सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि “पुलिस अंकल, ये मोबाइल जिसका है आप उन्हें दे । जब चौकी इंचार्ज ने मोबाइल की जांच की तो पता चला कि मोबाइल का लॉक खुला हुआ था। उन्होंने तुरंत मोबाइल के नंबर पर फोन किया और फोन के असली मालिक से बात की।

मोबाइल के मालिक को खबर दी गई कि उनका मोबाइल पुलिस चौकी पर सुरक्षित है और वे उसे लेकर जा सकते हैं।इस सराहनीय कार्य को अंजाम देने वाले दो बच्चे हसनैन और समीर हैं। हसनैन इकरार का बेटा है और कर्बला क्षेत्र का निवासी है, जबकि समीर लाइक पुत्र जयंतीपुर के रहने वाले हैं। बच्चों ने यह काम न केवल अपनी ईमानदारी बल्कि अपने साहस के लिए किया जिसने पुलिस और आम जनता दोनों के दिल जीत लिए। चौकी इंचार्ज प्रबोद कुमार सिंह ने बच्चों की इस ईमानदार पहल की कड़ी प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि बच्चों ने जो कदम उठाया है वह अन्य बच्चों के लिए प्रेरणादायक है। बच्चों की ईमानदारी और तत्परता को देखते हुए पुलिस ने उन्हें सम्मान स्वरूप ईनाम भी दिया। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे बच्चे समाज और देश के लिए उज्जवल उदाहरण बने, इस बात की कामना की यह घटना दर्शाती है कि आज के युवा पीढ़ी में भी सच्चाई और नैतिकता की कोई कमी नहीं है। बच्चों की यह पहल समाज में एक सकारात्मक संदेश देती है कि किस प्रकार ईमानदारी और जिम्मेदारी का भाव बच्चों के मन में जन्म ले रहा है।

यह उदाहरण सभी के लिए प्रेरणा है कि छोटी-छोटी अच्छी आदतें और कर्म समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। इस नेक कदम को पुलिस प्रशासन ने न केवल सराहा बल्कि इसे आगे भी प्रोत्साहित किया। साथ ही स्थानीय जनता ने भी बच्चों की साहस और नैतिकता की गंदी तारीफ की। सोशल मीडिया और स्थानिक लोगों ने बच्चों को भविष्य में भी इसी तरह अच्छे कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। यह स्पष्ट करता है कि समाज में बुराई के मुकाबले अच्छाई की हमेशा गूंज होती है।

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