कांठ में झोलाछाप बिना डिग्री के बन गया BAMS और करने लगा एलोपैथिक दवाओं से इलाज

उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। कांठ में एक झोलाछाप बिना डिग्री के BAMS डाॅक्टर बन गया और आयुर्विदक दवाओं के बजाए एलोपैथिक दवाओं से इलाज करने लगा। IGRS पर शिकायत के बाद जांच में दूध का दूध और पानी का पानी होने पर अब झोलाछाप पर कानूनी शिकंजा कसते हुए FIR दर्ज हुई है तो क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।

यह मामला है कांठ थानाक्षेत्र के पट्टीवाला में शहजाद सिददीकी ( 36) शहजाद सिद्दीकी जिन पर किसी प्रकार की चिकित्सा करने की डिग्री नहीं है लेकिन उन्होंने अपने नाम के आगे BAMS लिखा और डाॅक्टर बन गया। इतना ही नहीं इन्होंने बाकायदा क्लीनिक/ नर्सिंग होम खोल लिया और एलोपैथिक दावों से इलाज करने लगे।

जून में आईजीआरएस पर पीड़ित व्यक्ति ने इनकी शिकायत की तो कांठ के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर राजीव सिंह ने अपनी टीम के साथ क्लीनिक/ नर्सिंग होम पर छापामार कार्रवाई की तो 2 BP मशीन, स्टोपस्कोप, एलोपैथीक दवाइयां, नेबुलाजर, केंची, वेट मशीन, एक डस्टविन मे बायोमेडिकल वेस्ट मौके पर पाया गया तथा एक डब्बे में अधिक मात्रा मे सिरिंज भरी हुई पायी गयी है इनके यहा IV फ्लूड भी पाये गये। कोई भी डिग्री व पंजीकरण नहीं पाया गया। तथा इनके पास कोई डिग्री व डिप्लोमा उपलब्ध नहीं था ना ही मौके पर क्लीनिक का कोई पंजीकरण प्रमाण पत्र व डाॅक्टर की उपाधि (डिग्री) प्राप्त नहीं हुई।

निरीक्षण के दौरान मौके पर इंजेक्शन एवं दवाइयां प्राप्त हुई है। क्लीनिक पर अन्य सामान भी पाया गया जिसमे 2 BP मशीन, स्ठेतोस्कोप, एलोपैथीक दवाईया, नेबुलाजर, केंची, वेट मशीन, एक डस्टविन मे बायोमेडिकल वेस्ट मोके पर पाया गया तथा एक डब्बे में अधिक मात्रा मे सिरिंज भरी हुई पायी गयी है इनके यहा IV फ्लूड भी पाये गये है तथा इनके क्लीनिक पर 2 बेड भी मोजूद पाई गई है। जिसको शहजाद ने स्वीकार करते हुये पुष्टि की है कि उपरोक्त दवा एवं उपकरण उनके क्लीनिक पर मिले हैं। उपरोक्त सभी बातो को व क्लीनिक में मिले उपरोक्त सामान जो भी पाया गया है इन्होंने उसे पूर्ण रूप से स्वयं स्वीकार किया है जिसको शहजाद ने अपने हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणित भी किया है। इनके पास इस कार्य करने के लिए कोई भी डिप्लोमा या प्रमाण पत्र नहीं है जो की नियम विरुद है तथा इनके यहा जनता पथोलोजी लैब की 2 लैब रिपोर्ट प्राप्त हुई।

शहजाद के अभिलेख फर्जी बिना चिकित्सा उपाधि के मरीजो का ईलाज करना पर्यावरण को नुकसान पहुंचना है व मरीजो को एंटीवायोटिक देना मरीजो के साथ धोखाधडी करना जिससे मरीजो की जान से खेलना प्रथम दृष्स्टता अपराध है तथा क्लीनिक मे बायोमेडिकल वेस्ट कि कोई भी व्यवस्था नहीं पायी गयी। इनके क्लीनिक का पंजीकरण मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में पंजीकृत नहीं है। इस संबंध में कांठ के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. राजीव सिंह ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी।

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