जम्मू-कश्मीर में छिपे हैं 76 आतंकी, 55 पाकिस्तानी, 21 लोकल : सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती

पहलगाम हमले पर राजनाथ सिंह का कड़ा बयान : भारत को डरा नहीं सकते, मिलेगा सख्त जवाब


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में शामिल लोगों को जल्द ही करारा जवाब मिलेगा और भारत आतंकवाद से डरने वाला नहीं है। यह बयान 26 लोगों की हत्या के एक दिन बाद आया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी और हम न केवल हमलावरों का पता लगाएंगे, बल्कि उन लोगों तक भी पहुंचेंगे जिन्होंने इस हमले की साजिश रची। उन्होंने कहा कि भारत एक पुरानी सभ्यता और बड़ा देश है, जिसे आतंकवाद से डराया नहीं जा सकता। उन्होंने हमले को अमानवीय बताते हुए भारत की जीरो टॉलरेंस नीति की पुनः पुष्टि की और कहा कि देश के सभी नागरिक इस कायराना हमले के खिलाफ एकजुट हैं।

जम्मू-कश्मीर में छिपे हैं 76 आतंकी, 55 पाकिस्तानी, 21 लोकल : सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती


जम्मू-कश्मीर में इस समय लगभग 76 आतंकी सक्रिय हैं, जिनमें से 55 पाकिस्तान से हैं और 21 स्थानीय। इन आतंकियों में से अधिकांश की ट्रेनिंग अफगानिस्तान बॉर्डर पर हुई है। इन तक पहुंच पाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। पाकिस्तान की आईएसआई आतंकियों की घाटी में भर्ती और समर्थन में सक्रिय है। नेपाल रूट से भी घुसपैठ की संभावना पर नजर रखी जा रही है। पहल्गाम हमले सहित कई घटनाओं में पाकिस्तानी आतंकियों की संलिप्तता पाई गई है। राजौरी, कोकेरनाग और कंडी जंगल जैसी जगहों पर हुई मुठभेड़ों में हाई-प्रोफाइल आतंकी शामिल थे। इन आतंकियों को स्थानीय समर्थन मिल रहा है, जिससे वे हमलों को अंजाम दे रहे हैं। हाइब्रिड आतंकियों का इस्तेमाल टारगेट किलिंग के लिए किया जा रहा है। ये आतंकी सामान्य मोबाइल का प्रयोग नहीं करते, जिससे उनकी ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है। ज्यादातर सूचनाएं मुखबिरों से मिलती हैं, लेकिन उनमें भी स्पष्टता की कमी होती है। अब घाटी में नए आतंकी सामने नहीं आ रहे। जो पहले से मौजूद हैं, वही अब स्लीपर सेल्स के जरिए गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। गुमशुदा युवाओं को आतंकी संगठन ब्रेनवॉश कर फोटो वायरल करते हैं। इसके बाद वे युवाओं को आतंकी घोषित कर देते हैं, जिससे उनका मुख्यधारा में लौटना मुश्किल हो जाता है। घाटी में आतंक का यह नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में हाईली ट्रेंड आतंकियों द्वारा संचालित हो रहा है, जिन्हें सीमा पार से हर संभव समर्थन मिल रहा है। इनकी सफाई के बिना क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना मुश्किल बना हुआ है।

दिल्ली में सुरक्षा सख्त, पहलगाम आतंकी हमले के बाद हाई अलर्ट जारी


जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। खास तौर पर कुतुब मीनार, लाल किला, इंडिया गेट, लोटस टेंपल, अक्षरधाम जैसे टूरिस्ट स्पॉट्स पर पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है। मेट्रो स्टेशन, मॉल्स और बाजारों में भी सख्त निगरानी रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस की टीमें जगह-जगह बैरिकेड लगाकर संदिग्धों की चेकिंग कर रही हैं। साउथ दिल्ली के डीसीपी अंकित चौहान और आउटर जिले के डीसीपी सचिन शर्मा ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों की पुष्टि की है। दिल्ली के द्वारका, जनकपुरी, पश्चिमी दिल्ली जैसे इलाकों में भी रात भर पुलिस की सक्रियता देखी गई। ऐसा सुरक्षा प्रबंध आमतौर पर राष्ट्रीय पर्व या त्योहारों पर देखा जाता है, लेकिन इस बार आतंकी हमले के मद्देनज़र एहतियात के तौर पर तैनाती की गई है।

शहीद पति को अंतिम विदाई देते हुए पत्नी ने कहा : ‘जय हिंद’, आंखों में आंसू, होंठों पर सलाम


जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में करनाल निवासी भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल शहीद हो गए। हमले के वक्त वे अपनी पत्नी हिमांशी के साथ हनीमून पर थे। दोनों की शादी हाल ही में 16 अप्रैल को मसूरी में हुई थी और 19 अप्रैल को करनाल में रिसेप्शन हुआ था। परिवार यूरोप ट्रिप की योजना बना रहा था, लेकिन वीजा न मिलने के कारण उन्होंने कश्मीर जाने का फैसला लिया। हमले में विनय को गोली लगी और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। हिमांशी भी हमले में घायल हुई हैं। शहीद लेफ्टिनेंट विनय के पार्थिव शरीर के सामने पत्नी हिमांशी का रो-रो कर बुरा हाल है।परिवार, रिश्तेदार और स्थानीय लोग शोक में डूबे हुए हैं। विनय के दादा हवा सिंह पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हैं और पिता राजेंद्र नरवाल केंद्र सरकार के कस्टम विभाग में कार्यरत हैं। यह आतंकी हमला अब तक के सबसे क्रूर नागरिक हमलों में से एक है, जिसमें 26 लोगों की जान गई। हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े टीआरएफ ने ली है। केंद्र सरकार ने इसकी जांच एनआईए को सौंपी है।

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