बिना कर्म के न जीवन का निर्वाह संभव और न कार्य की सिद्धि: स्वामी कृष्णानंद

लव इंडिया, संभल। गीता ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर भक्तों ने गीता के दिव्य ज्ञान का भरपूर लाभ प्राप्त किया। और अध्यक्ष दीपा बाष्णेय का आभार भी व्यक्त किया कि हमें इस पुनीत पुण्य कार्य का भागी बनाया। गीता व्यास स्वामी कृष्णानंद जी ने गीता के अध्याय 5, 6 एवं 7 का अत्यंत सरल, सारगर्भित एवं जीवनोपयोगी व्याख्यान प्रस्तुत किया।

स्वामी जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि मानव जीवन का मूल उद्देश्य कर्मयोग है। जन्म से लेकर मरण तक मनुष्य कर्म करने के लिए बाध्य है। बिना कर्म के न तो जीवन का निर्वाह संभव है और न ही किसी कार्य की सिद्धि। इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए सत्कर्मों में निरंतर लगे रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्म ही साधन है और कर्म के द्वारा ही हर कार्य पूर्णता को प्राप्त होता है।

स्वामी जी ने आगे कहा कि कर्म को सही दिशा देने के लिए मन का नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। मन यदि संयमित है, तो व्यक्ति सही और गलत का निर्णय सहजता से कर सकता है। “क्या करना है और क्या नहीं करना है”—इसका वास्तविक ज्ञान किसी तत्वज्ञानी गुरु के सान्निध्य में ही प्राप्त होता है। गुरु के प्रति श्रद्धा, सेवा भाव और जिज्ञासा के साथ प्रश्न करने से ही ज्ञान का द्वार खुलता है और जीवन का मार्ग प्रशस्त होता है।

उन्होंने ज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संसार में ज्ञान से बढ़कर कुछ भी नहीं है। ज्ञान के माध्यम से व्यक्ति सभी साधनों को प्राप्त कर सकता है, किंतु केवल साधनों के माध्यम से ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। सच्चा ज्ञान बाहरी मायावी संसार में नहीं, बल्कि हमारे अपने अंतःकरण में विद्यमान है। जब व्यक्ति अध्यात्म के मार्ग पर चलता है, तब वह इस सत्य को अनुभव करता है कि ज्ञान उसकी आत्मा में ही स्थित है।

अंत में स्वामी जी ने अपने श्रीमुख से प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा कि जीवन में दुःखों का अंत वही कर सकता है जो अनुशासन और संतुलन को अपनाता है। समय पर जागना, समय पर संतुलित आहार लेना, नियमित आचार-विचार रखना और समय का सदुपयोग करते हुए अपने कार्यों को पूर्ण करना—यही सफलता और शांति का मूल मंत्र है।

कार्यक्रम का समापन भक्ति भाव से ओत-प्रोत भजन-कीर्तन एवं मंगलमयी आरती के साथ हुआ। श्रद्धालु भक्तगण भक्ति रस में भावविभोर होकर नृत्य एवं संकीर्तन करते हुए भगवान के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते नजर आए। पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार हुआ, जिससे सभी उपस्थित जनमानस आनंद और शांति का अनुभव करते हुए अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देने का संकल्प लेकर लौटे।

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