मुरादाबाद के मंडल आयुक्त आफिस के वरिष्ठ सहायक के खिलाफ दहेज उपयोग का मुकदमा

उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग के हस्तक्षेप पर महिला थाना पुलिस ने मुरादाबाद मंडल आयुक्त कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक के खिलाफ दहेज उत्पीड़न समेत कई गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज किया है। यह मुकदमा उनकी पत्नी की शिकायत पर महिला थाने में लिखा गया है। वरिष्ठ सहायक की पत्नी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला सहित चिकित्सालय में स्टाफ नर्स हैं।

सिविल लाइन के पीछे पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला संयुक्त चिकित्सालय है। इसी में प्रियंका कुमारी स्टाफ नर्स है और चिकित्सालय प्रांगण में ही बने सरकारी आवास में रहती हैं। उनके पति सतीश कुमार मुरादाबाद के मंडल आयुक्त कार्यालय में वरिष्ठ सहायक हैं। इन दोनों के पारिवारिक जीवन में लंबे अरसे से खटास है और इसकी जानकारी पंडित दीनदयाल उपाध्यक्ष जिला संयुक्त चिकित्सालय के स्टाफ को भी है क्योंकि कई बार अस्पताल में भी विवाद हुआ है।

फिलहाल अब स्टाफ नर्स प्रियंका कुमारी की शिकायत पर महिला थाना पुलिस में रिपोर्ट दर्ज की है इस रिपोर्ट में स्टाफ नर्स प्रियंका कुमारी ने अपने पति, जेठ, सास और ससुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसमें पति के व्यवहार को क्रूर बताते हुए मारपीट और मानसिक उत्पीड़न का भी आरोप है। साथी कहां है कि दहेज के रूप में प्लाट और पूरी सैलरी मांगी जा रही है। विरोध करने पर गाली गलौज मारपीट, आप्राकृतिक संबंध और अत्याचार का आरोप भी है।

रिपोर्ट में स्टाफ नर्स में कहा है कि उन्होंने सुरक्षा की दृष्टि से घर में सीसीटीवी कैमरा लगाया था जिसे पति ने तोड़ा और घर का सामान गोभी क्षतिग्रस्त किया। इतना ही नहीं घर का सामान भी पति पर ले जाने का आरोप लगाया है।

स्टाफ नर्स ने 3 अक्टूबर 2023 की रात में घर पर पति, सास, ससुर व जेठ पर मारपीट, 12 मई 2024 को रात मे 12 बजे ताले में बंद करके बाहर चला जाने और 22 अप्रैल 2025 को पति व सास ससुर पर प्लाट खरीदने की मांग और मानसिक रूप से प्रताड़ित और पति पर हर महीने की सैलरी मांगने, जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी हैं।

स्टाफ नर्स ने कहा है कि इन सभी घटनाओं की सूचना समय समय पर पुलिस थाने में दी गई। पुलिस ने उसके दबाव में आने के कारण कुछ नहीं किया। जबकि रोजमर्रा मारपीट, गलत तरिके से यौन उत्पीडन और सास-ससुर और पति भी दहेज के रूप में प्लाट की डिमांड कर रहे हैं।

स्टाफ नर्स में दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया है मेरा पति पुलिस के सामने ही मरने की धमकी देता है मेरे भाइयों को मारने की धमकी देता है थाने में दरोगा साहब उसी के सामने मुझे है डांटकर बापस कर देते है उसी के फेवर की बात करते है क्योकि मेरा पति कमिश्नर आफिस में वरिष्ठ सहायक के पद पर मुरादाबाद में नौकरी करता है उसी का दबाब देता है की तेरे घर को और तुझे तो बर्बाद कर दूंगा तुझे जान से मार दूंगा मेरा कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता। आप पति ससुरालजनों ससुर धर्मवीर सास राजकली व जेठ मुनीश के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने की कृपा करें। मेरे साथ रेगुलर बेसिस पर

स्टाफ नर्स प्रियंका के मुताबिक, मैंने पहले उ प्र राज्य महिला आयोग को ईमेल भी किया था। कल आने पर मुझे सीओ ऑफिस में बुलाया गया लेकिन कोई कानूनी कार्यवाही नही हुई है। मुझे डर है कि मेरे साथ कोई बड़ी घटना ना हो जाये। स्टाफ नर्स ने पति, ससुर धर्मवीर, सास राजकली व जेठ मुनीश के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने की की मांग की है फिलहाल महिला थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा और यह है सजा का प्रावधान

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A की जगह लेती है।  इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की क्रूरता शामिल हो सकती है और इसके दोषी को तीन साल तक की कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान है। पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा किसी महिला के प्रति की गई क्रूरता से संबंधित है।

BNS की धारा 85 का मुख्य बिंदु:

  • अपराध का स्वरूप: कोई भी पुरुष, जो किसी महिला का पति या पति का रिश्तेदार हो, यदि उस महिला के साथ क्रूरता करेगा, तो वह धारा 85 के तहत दंडनीय होगा. 
  • सजा: दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को तीन साल तक के कारावास की सजा और जुर्माना भी लगाया जाएगा. 
  • भारतीय न्याय संहिता का संबंध: यह धारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 का हिस्सा है और महिलाओं को वैवाहिक क्रूरता से बचाने के उद्देश्य से बनाई गई है. 
  • क्रूरता की परिभाषा: धारा 86 के तहत क्रूरता को परिभाषित किया गया है. इसमें ऐसे कार्य शामिल हैं जो महिला को आत्महत्या के लिए प्रेरित करें, या उसके जीवन, अंग या स्वास्थ्य (मानसिक या शारीरिक) को गंभीर चोट या खतरा पहुंचाएं. 

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) स्वेच्छा से चोट पहुँचाने के अपराध से संबंधित है, जिसमें आरोपी को एक वर्ष तक का कारावास, दस हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसा कार्य करता है जिससे किसी अन्य व्यक्ति को चोट लगने की संभावना हो. 

  • अपराध का प्रकार: यह धारा किसी ऐसे कार्य से संबंधित है जो स्वेच्छा से चोट पहुँचाने के इरादे से या चोट लगने की संभावना के बारे में जानते हुए किया गया हो. 
  • दंड: इस धारा के तहत अधिकतम एक वर्ष का कारावास या 10,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है. 
  • उदाहरण: यदि कोई व्यक्ति किसी को धक्का देता है या मारपीट करता है, जिससे उसे चोट लग जाती है, और ऐसा व्यक्ति जानता था कि उसके कार्य से चोट लग सकती है, तो यह BNS की धारा 115(2) के तहत दंडनीय अपराध होगा. 
  • सजा का निर्धारण: अदालत मामले की गंभीरता और आरोपी के आपराधिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए सजा की अवधि और प्रकार तय करती है. 

धारा 352 की मुख्य बातें

  • अपमान और उकसावा: यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति का अपमान करता है, और ऐसा करके उसे उकसाता है, तो यह अपराध माना जाता है। 
  • उद्देश्य: इस अपमान का उद्देश्य यह होना चाहिए कि या तो इससे सार्वजनिक शांति भंग हो या फिर दूसरा व्यक्ति कोई और अपराध करने के लिए उकसाया जाए। 
  • दंड: ऐसे अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को दो साल तक की कैद, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जा सकता है। 

धारा 351(3) की मुख्य बातें

  • आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation): यह धारा उन धमकियों से संबंधित है जिनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को डराना या उसे कोई कार्य करने या न करने के लिए मजबूर करना होता है। 
  • गंभीर धमकियां: विशेष रूप से, इस उपधारा में निम्नलिखित गंभीर धमकियों को शामिल किया गया है:
    • मृत्यु या गंभीर चोट पहुंचाने की धमकी। 
    • आग से किसी संपत्ति को नष्ट करने की धमकी। 
    • एक ऐसे अपराध को करने की धमकी देना जिसकी सजा मृत्यु, आजीवन कारावास या सात साल तक के कारावास हो। 
    • किसी महिला पर व्यभिचार का आरोप लगाने की धमकी देना। 

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3

  • दहेज का लेन-देन या मांग करना: यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के लागू होने के बाद दहेज देता है या लेता है, या किसी को ऐसा करने के लिए उकसाता है, तो वह इस धारा के तहत दंडनीय होगा. 
  • दंड का प्रावधान:
    • कैद: कम से कम पांच वर्ष की कारावास. 
    • जुर्माना: ₹15,000 या ऐसे दहेज के मूल्य की राशि, जो भी अधिक हो. 

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 4

इस धारा का उद्देश्य दहेज की मांग को रोकना है, जो अक्सर महिलाओं के प्रति हिंसा और उत्पीड़न का कारण बनता है. यह कानून दहेज लेने और देने के साथ-साथ दहेज की मांग करने को भी दंडनीय बनाता है, ताकि इस प्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सके. 

क्या दंड का प्रावधान है? 

यह कानून दुल्हन या दूल्हे के किसी भी माता-पिता, रिश्तेदार या संरक्षक पर लागू होता है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दहेज मांगता है

  • कारावास: न्यूनतम छह महीने और अधिकतम दो साल तक की कैद.
  • जुर्माना: दस हजार रुपये तक का जुर्माना.

Note: The information regarding the punishment provisions of the Indian Penal Code and Dowry Prohibition Act in the case registered has been taken from various social media sites.

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