🔱 नवरात्र के नौ दिन केवल पूजा के नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति, संयम और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के दिन होते हैं। हर देवी का स्वरूप जीवन के अलग-अलग पहलुओं को मजबूत बनाता है।

चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विशेष महत्व, सही विधि से करें आराधना
लव इंडिया, मुरादाबाद। चैत्र नवरात्र का पावन पर्व कल से शुरू हो रहा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में विधि-विधान से पूजा करने पर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना (कलश स्थापना) का विशेष महत्व होता है, जिससे पूरे नौ दिन की पूजा की शुरुआत होती है।
🪔 ऐसे करें घट स्थापना (कलश स्थापना)

नवरात्र के पहले दिन सुबह शुभ मुहूर्त में पूजा स्थल को साफ करके मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद—
मिट्टी के पात्र में जौ (जवारे) बोएं
उस पर जल से भरा कलश रखें
कलश पर आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें
कलश के पास अखंड ज्योति जलाएं
मां दुर्गा का आह्वान कर पूजा शुरू करें
👉 मान्यता है कि घट स्थापना से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
1️⃣ मां शैलपुत्री

👉 महत्व: मां शैलपुत्री को शक्ति का पहला स्वरूप माना जाता है। ये जीवन में स्थिरता, साहस और दृढ़ता प्रदान करती हैं।
📖 कथा: मां शैलपुत्री, पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। पूर्व जन्म में ये मां सती थीं, जिन्होंने भगवान शिव से विवाह किया था। जब उनके पिता दक्ष ने शिवजी का अपमान किया, तो सती ने यज्ञ में खुद को अग्नि को समर्पित कर दिया। अगले जन्म में वे शैलपुत्री के रूप में जन्मीं और फिर शिवजी को प्राप्त किया।
2️⃣ मां ब्रह्मचारिणी

👉 महत्व: तप, संयम और त्याग की देवी। ये साधना में सफलता और आत्मबल देती हैं।
📖 कथा: मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। हजारों वर्षों तक बिना अन्न और जल के तपस्या की। उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
3️⃣ मां चंद्रघंटा

👉 महत्व: साहस, वीरता और शांति की देवी। ये भय और संकट से रक्षा करती हैं।
📖 कथा: शिवजी से विवाह के बाद मां ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा गया। युद्ध के समय इनके घंटे की ध्वनि से दुष्टों का नाश होता था और भक्तों की रक्षा होती थी।
4️⃣ मां कूष्मांडा

👉 महत्व: सृष्टि की रचयिता मानी जाती हैं। ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि देती हैं।
📖 कथा: जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसलिए इन्हें सृष्टि की जननी कहा जाता है।
5️⃣ मां स्कंदमाता

👉 महत्व: ममता, प्रेम और संतान सुख देने वाली देवी।
📖 कथा: मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। उन्होंने अपने पुत्र को गोद में लेकर दैत्यों का संहार किया। उनकी पूजा से संतान की रक्षा और सुख मिलता है।
6️⃣ मां कात्यायनी

👉 महत्व: शक्ति, साहस और न्याय की देवी। विवाह और मनोकामना पूर्ति में विशेष पूजा की जाती है।
📖 कथा: ऋषि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनके घर जन्म लिया और कात्यायनी नाम से प्रसिद्ध हुईं। इन्होंने महिषासुर का वध कर धर्म की रक्षा की।
7️⃣ मां कालरात्रि

👉 महत्व: भय, नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों का नाश करती हैं।
📖 कथा: मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयंकर है, लेकिन वे भक्तों के लिए शुभ फल देने वाली हैं। इन्होंने कई दैत्यों का संहार किया और संसार को भय से मुक्त किया।
8️⃣ मां महागौरी

👉 महत्व: पवित्रता, शांति और सुंदरता की देवी।
📖 कथा: कठोर तपस्या के कारण मां का शरीर काला पड़ गया था। बाद में गंगा जल से स्नान करने पर उनका रूप अत्यंत गौर हो गया, इसलिए इन्हें महागौरी कहा गया।
9️⃣ मां सिद्धिदात्री

👉 महत्व: सिद्धि, सफलता और ज्ञान देने वाली देवी।
📖 कथा: मां सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों की दाता हैं। भगवान शिव ने भी इनकी आराधना कर सिद्धियां प्राप्त की थीं। इन्हीं के कारण शिवजी का आधा शरीर देवी रूप में परिवर्तित हुआ, जिसे अर्धनारीश्वर कहा जाता है।
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