नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों यह दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि भारत में अब दूध बेचने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इस दावे के बाद छोटे दूध विक्रेताओं और डेयरी कारोबारियों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा मैसेज

दरअसल, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के नियमों के अनुसार जो भी व्यक्ति खाद्य पदार्थों का कारोबार करता है, उसे FSSAI में पंजीकरण या लाइसेंस लेना आवश्यक होता है। दूध भी खाद्य पदार्थ की श्रेणी में आता है, इसलिए दूध बेचने वाले कारोबारियों पर भी यह नियम लागू होता है।
FSSAI ने दूध बेचने वालों के रजिस्ट्रेशन पर दिया जोर

हाल ही में FSSAI ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी है कि जो दूध उत्पादक या विक्रेता डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य नहीं हैं और सीधे बाजार में दूध बेचते हैं, उन्हें FSSAI में रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेने के लिए प्रेरित किया जाए।
किन लोगों को लेना होगा लाइसेंस
FSSAI के नियमों के अनुसार निम्न लोगों को पंजीकरण या लाइसेंस लेना पड़ सकता है:-
घर-घर दूध सप्लाई करने वाले दूध विक्रेता
निजी डेयरी संचालक
दूध और दूध से बने उत्पाद बेचने वाले व्यापारी
दही, पनीर, खोया आदि बनाने और बेचने वाले कारोबारी
किन्हें मिलेगी छूट

जो किसान या दुग्ध उत्पादक डेयरी सहकारी समितियों जैसे अमूल, पराग या अन्य दुग्ध संघों के सदस्य हैं और अपना पूरा दूध उन्हीं को बेचते हैं, उन्हें अलग से लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होती।
लाइसेंस कहाँ बनता है
FSSAI का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन पोर्टल FoSCoS के माध्यम से बनाया जाता है।
वेबसाइट:
https://foscos.fssai.gov.in�
कितनी है फीस
छोटे दूध विक्रेताओं के लिए आमतौर पर बेसिक रजिस्ट्रेशन ही पर्याप्त होता है।
छोटे कारोबार (₹12 लाख तक) : ₹100 प्रति वर्ष
राज्य लाइसेंस : ₹2000 से ₹5000 प्रति वर्ष
केंद्रीय लाइसेंस : ₹7500 प्रति वर्ष
पूरे देश में लागू नियम

FSSAI के नियम पूरे भारत में लागू होते हैं, इसलिए यह व्यवस्था सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर समान रूप से लागू होती है।
बिना लाइसेंस कारोबार पर कार्रवाई
यदि कोई व्यक्ति बिना पंजीकरण या लाइसेंस के खाद्य कारोबार करता है तो उस पर जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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