सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष फिरोज खां का विद्युत चोरी निर्धारण बिल निरस्त
लव इंडिया, मुरादाबाद/ संभल। स्थाई लोक अदालत, मुरादाबाद ने संभल जनपद के समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष फिरोज खां के विरुद्ध विद्युत चोरी निर्धारण बिल निरस्त कर दिया।

विद्युत वितरण खंड कार्यालय संभल द्वारा पहले रुपए 55,53,288/-का विद्युत चोरी संबंधी राजस्व निर्धारण बिल तैयार किया गया। नियमानुसार आपत्ति करने पर रुपए 29,20,114/- का संशोधित कर जारी किया गया लेकिन सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष फिरोज खां ने विद्युत चोरी से इन्कार करते हुए संशोधित बिल को भी न्यायालय में चुनौती दी। स्थाई लोक अदालत, मुरादाबाद ने उनके पक्ष को सुना और संशोधित बिल को भी गलत मानते हुए एक वर्ष पूर्व का विद्युत बिल दोगुना करके वसूल करने एवं उच्च न्यायालय के आदेश पर जमा धनराशि को वापस करने के आदेश दे दिए l
संभल के सरायतरीन के मोहल्ला नजर खेल,निवासी फिरोज खां समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे हैं। पुलिस प्रवर्तन दल के अधिकारियों द्वारा 21 अक्तूबर 2024 को उनके पक्का बाग स्थित पार्टी कार्यालय पर विद्युत चोरी दिखा कर एक प्रथम सूचना रिपोर्ट भी दर्ज कराई जिसके अनुक्रम में विद्युत वितरण खंड संभल द्वारा उनके विरुद्ध एक प्रस्तावित राजस्व निर्धारण बिल संख्या 9558, दिनांकित 25 अक्टूबर 2024 भेजा गया।
बिल में विद्युत चोरी के संबंध में 55,53283 रुपए की मांग की गई जिसके विरुद्ध वादी द्वारा अपना प्रत्यावेदन दिनांक 6 नवम्बर,2024 प्रेषित कर इस आशय का अनुरोध किया गया कि दिनांक 20 अक्तूबर को उसके परिसर पर कोई विद्युत चैकिंग नहीं हुई और प्रस्तावित राजस्व निर्धारण बिल भारतीय विद्युत अधिनियम एवं उत्तर प्रदेश विद्युत आपूर्ति संहिता में वर्णित प्रावधानों के विपरीत तैयार किया गया है और राजस्व बिल को निरस्त करने का अनुरोध किया गया जिस पर विद्युत वितरण खंड संभल ने बिल को संशोधित कर 22 अप्रैल,2025 को रूपये 29,20,114/-जारी कर रुपए जमा कराने का निर्देश दिया गया।
इस पर वादी द्वारा राजस्व निर्धारण धनराशि जमा ना करके बिल को उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के माध्यम से स्थायी लोक अदालत मुरादाबाद में चुनौती दी जिसमें कहा गया कि राजस्व निर्धारण बिल एलएमबी 1 श्रेणी के स्थान पर एलएमबी 4 श्रेणी का गलत तरीके से बनाया गया है समाजवादी पार्टी का नेता होने के कारण झूठा फंसाया गया हैं। बिल के माध्यम से वर्ष 2011 से बकाया दर्शाकर धनराशि गलत तरीके से मांगी जा रही है। केवल एक वर्ष का ही राजस्व निर्धारण बिल तैयार किया जा सकता था। बिल की गणना में घंटों को 8 के स्थान पर 22 गलत तरीके से की गई है और बिल को निरस्त करने का अनुरोध किया गया।

विद्युत विभाग द्वारा न्यायालय को अवगत कराया गया कि कि स्थाई लोक अदालत को विद्युत चोरी के मामलों की सुनवाई का अधिकार नहीं है और बिल नियमानुसार बनाया गया है। दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत स्थाई लोक अदालत ने विद्युत वितरण खंड द्वारा जारी बिल रुपए 29,20114 रुपए, 22 अप्रैल 2025 निरस्त कर दिया और खंड कार्यालय को आदेश दिया और कहा कि वह एलएमबी- 1 के तहत प्रयोग की गई विद्युत 3301 वाट का निरीक्षण की दिनांक से एक वर्ष पूर्व का विद्युत मूल्य दोगुना करके वसूल करे l

✍️विद्युत विभाग द्वारा विद्युत चोरी के मामलों में राजस्व निर्धारण की धनराशि की गणना निरंतर गलत तरीके से की जा रही है जिससे उपभोक्ता काफी परेशान रहता है। उपभोक्ताओं को नियमानुसार बिल जारी हो, सुनवाई का समुचित अवसर मिले तो निश्चित रूप से भ्रष्टाचार से निजात मिलेगी और उपभोक्ता भी स्वयं को संतुष्ट महसूस करेगा। मुकदमेबाजी से दोनों पक्षों को निजात मिलेगी।
देवेंद्र वार्ष्णेय
उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता

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