देशभर में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़े स्तर पर निगरानी शुरू की गई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने उन दवाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है, जो फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) श्रेणी में आती हैं और जिनकी प्रभावशीलता या अनुमति संदिग्ध मानी जा रही है।

इस अभियान के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को लगभग 90 ऐसी दवाओं की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाल ही में जारी ड्रग अलर्ट रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में जांच के दौरान कुल 194 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित 73 दवाएं भी शामिल हैं।

बताया गया है कि जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उनमें ब्लड प्रेशर, संक्रमण, अल्सर, विटामिन, खांसी, निमोनिया, सर्दी-जुखाम, बुखार और एसिडिटी जैसी आम बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।

हिमाचल प्रदेश के राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर के अनुसार, जिन कंपनियों की दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। साथ ही ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए इन दवाओं का स्टॉक बाजार से वापस मंगवाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
📌 किन कंपनियों पर कार्रवाई की तैयारी

जिन दवा कंपनियों के उत्पादों के सैंपल मानकों पर फेल पाए गए हैं, उनमें कालाअंब, ऊना, बद्दी, सोलन, कांगड़ा और पांवटा साहिब स्थित कई फार्मा यूनिट्स शामिल हैं। इनमें एथेंस लैब, जिंदल मेडियर, सार बायोटेक, मर्क लैब, स्विस गार्नियर, चिमक हेल्थकेयर, लियोटिक फार्मा, क्योरटेक स्किन केयर, लेबोरेट, राचिल फार्मा और मार्टिन एंक क्रो जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं।
इसके अलावा भी कई अन्य कंपनियों के सैंपल गुणवत्ता जांच में असफल पाए गए हैं, जिन पर आगे कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
⚠️ क्या है FDC दवाएं?

फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाएं वे होती हैं, जिनमें दो या अधिक दवाओं का मिश्रण एक ही टैबलेट या सिरप में दिया जाता है। यदि इनका सही परीक्षण और अनुमति न हो, तो यह मरीजों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती हैं।
Hello world.