हाईकोर्ट बेंच की मांग: पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में वकीलों का आंदोलन, मुरादाबाद में बाजार बंद

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग तेज

मुरादाबाद। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित किए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती दिखाई दी। मुरादाबाद सहित पश्चिम यूपी के 22 जिलों में अधिवक्ताओं के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन हुए और कई शहरों में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे गए। वकीलों के इस आंदोलन को व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला।

सात दशक पुराना संघर्ष

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए हाईकोर्ट बेंच की मांग कोई नई नहीं है। यह मुद्दा पिछले 70 वर्षों से अधिक समय से उठता रहा है। अलग-अलग दौर में अधिवक्ताओं, सामाजिक संगठनों, किसान यूनियनों और आम नागरिकों ने इस मांग को लेकर आंदोलन किए। 22 जिलों वाले इस क्षेत्र से न्याय के लिए आज भी लोगों को सैकड़ों किलोमीटर दूर प्रयागराज जाना पड़ता है, जिसमें समय, धन और संसाधनों की भारी खपत होती है।

अधिवक्ताओं की हड़ताल और विरोध मार्च

बुधवार को हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने कामकाज ठप रखा और सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले वकीलों ने मुरादाबाद में बड़ा प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने भी बाजार बंद रखकर आंदोलन को समर्थन दिया।

कचहरी परिसर से शुरू हुआ विरोध मार्च गुरहट्टी, गंज, अमरोहा गेट होते हुए गवर्नमेंट कॉलेज परिसर तक पहुंचा। इस दौरान अधिवक्ताओं ने बैनर और पोस्टर लेकर नारेबाजी की और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को न्यायिक सुविधा देने की मांग दोहराई। मार्च में कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

किन जिलों में उठा आंदोलन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख जिलों—
मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, नोएडा, बागपत, शामली, हापुड़, संभल, रामपुर, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज और आसपास के क्षेत्रों—में अलग-अलग समय पर हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलन हो चुके हैं।

आंदोलन की उपलब्धियां और सीमाएं

✔ जन-जागरूकता के स्तर पर आंदोलन व्यापक रहा
✔ यह मुद्दा बार-बार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना
❌ इसके बावजूद अब तक हाईकोर्ट बेंच की स्थापना नहीं हो सकी

सरकारों की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, समितियां गठित हुईं और रिपोर्टें भी बनीं, लेकिन अंतिम निर्णय अब तक लंबित है।

आंदोलन के प्रमुख चरण

  • 1955–57 : शुरुआती संगठित आंदोलन
  • 1981 : पश्चिम यूपी में व्यापक वकील आंदोलन
  • 2001–02 : लंबे समय तक हड़ताल और प्रदर्शन
  • 2014–19 : केंद्र और राज्य स्तर पर दबाव
  • 2022–24 : फिर से तेज हुआ जनआंदोलन

क्यों जरूरी है पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच

  1. घनी आबादी – देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में शामिल
  2. मुकदमों का बोझ – लाखों केस प्रयागराज हाईकोर्ट में लंबित
  3. दूरी और खर्च – सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा आम लोगों पर भारी
  4. अपराध संवेदनशील क्षेत्र – त्वरित न्याय की आवश्यकता
  5. महिला और कमजोर वर्ग – सबसे अधिक परेशान

अन्य राज्यों से तुलना

देश के कई राज्यों में एक से अधिक हाईकोर्ट बेंच हैं, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े राज्य में पश्चिमी क्षेत्र आज भी इस सुविधा से वंचित है।

संभावित स्थानों पर मंथन

समय-समय पर मेरठ, आगरा, मुरादाबाद जैसे शहरों को संभावित स्थान के रूप में चर्चा में रखा गया है, लेकिन अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ।

सभा में वक्ताओं के विचार

गवर्नमेंट कॉलेज परिसर में हुई सभा में अधिवक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में देश की सबसे अधिक आबादी और मुकदमों का दबाव है, इसके बावजूद यहां हाईकोर्ट की कोई बेंच नहीं होना क्षेत्र के साथ अन्याय है। न्याय के लिए प्रयागराज जाना गरीब, किसान, मजदूर और महिलाओं के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है।

बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, मुरादाबाद के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने कहा कि अधिवक्ता, व्यापारी और सामाजिक संगठन एकजुट होकर इस मांग को उठा रहे हैं और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया है। यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो केंद्रीय संघर्ष समिति आगे की रणनीति तय करेगी। तहसील बार और कमिश्नरी बार ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।

समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष जयवीर यादव ने भी हाईकोर्ट बेंच की मांग को जनहित से जुड़ा बताते हुए सभी संगठनों के समर्थन की बात कही।

राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग केवल क्षेत्रीय सुविधा का प्रश्न नहीं, बल्कि न्यायिक समानता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। दशकों से चले आ रहे आंदोलन यह दर्शाते हैं कि यह मांग जनभावना से गहराई से जुड़ी है। अब निर्णय पूरी तरह राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है।

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