UP: दो मुस्लिम पत्रकारों पर एफआईआर का देशभर में विरोध

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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के साथ इंडियन वुमेंस प्रेस कोर ने भी FIR रद्द करने की मांग की

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा, यह जानकर पीड़ा हुई है कि यूपी पुलिस ने कथित लिंचिंग को सोशल मीडिया पर रिपोर्ट करने के लिए पत्रकार ज़ाकिर अली त्यागी और वसीम अकरम त्यागी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (धर्म, जाति समूह के आधार पर वैमनस्यता फैलाना) और 353 (सार्वजनिक अशांति पैदा करना) के तहत एफआईआर दर्ज की है।

नई दिल्ली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक मुसलमान व्यक्ति की कथित लिंचिंग को लेकर दो पत्रकारों पर मामला दर्ज किए जाने को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने आपत्ति जताई है।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने आपत्ति जताई

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा, यह जानकर पीड़ा हुई है कि यूपी पुलिस ने कथित लिंचिंग को सोशल मीडिया पर रिपोर्ट करने के लिए पत्रकार जाकिर अली त्यागी और वसीम अकरम त्यागी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (धर्म, जाति समूह के आधार पर वैमनस्यता फैलाना) और 353 (सार्वजनिक अशांति पैदा करना) के तहत एफआईआर दर्ज की है।

बयान के अनुसार

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं को रिपोर्टिंग, चाहे उस मैसेज का माध्यम कोई भी हो, प्रामाणिक पत्रकारिता की शर्ते पूरी करता है. बीएनएस का मनमाने तरीके से इस्तेमाल पत्रकारों को धमकाने के बराबर है, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1) (ए) का उल्लंघन है.% बयान में दोनों पत्रकारों के खलिाफ एफआईआर को रद्द किए जाने की मांग की गई है… इस संयुक्त बयान में इंडियन वुमेंस प्रेस कोर का नाम भी शामिल है।

क्या है मामला

स्थानीय मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, चार जुलाई की रात में हुई फ़िरोज़ कुरैशी की मौत के मामले में पांच लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें दो पत्रकार हैं। पुलिस का कहना है कि ये आपसी विवाद था. फिरोज नशे की हालत में राजेंद्र के घर में घुस गए थे और फिर दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ था। पत्रकार जाकिर अली त्यागी और वसीम

अकरम त्यागी ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट

अकरम त्यागी ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। अपना पक्ष रखते हुए एक्स पर जाकिर अली त्यागी ने लिखा, मेरे खलिाफ शामली पुलिस ने लिंचिंग के मामलें को रिपोर्ट करने की वजह से एफआईआर दर्ज की है, यह पहली बार नहीं है. इससे पहले भी मेरी रिपोर्टिंग की वजह से मुझ पर पाँच बार हमले हो चुके हैं, लेकिन हाल हो में मेरे खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर ने अन्य पत्रकारों को भी आश्चर्य में डाल दिया है।

पूर्व सांसद दानिश अली ने एक्स पर

पूर्व सांसद दानिश अली ने एक्स पर लिखा है, पत्रकार को निशाने पर लेना का यह एक क्लासिक केस है. यूपी पुलिस ने शामली हत्या में सांप्रदायिक एंगल को सामने लाने पर पत्रकारों के खलिाफ हो मामला दर्ज किया है जबकि जिन पर आरोप हैं वे गिरफ्तार नहीं हुए हैं. लगता है कि पुलिस की प्राथमिकता में दोषी को सजा दिलाने की बजाय न्याय को आवाज को दबाना हो गया है।

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