Sustainable Development Goals की प्राप्ति MainTechnics और Innovations का अहम रोल

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के प्रबंधन संस्थान टिमिट की ओर से सतत विकास लक्ष्यः चुनौतियां, मुद्दे एवम् व्यवहार- एसडीजी सीआईपी 2025 पर दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों पर हुई गहन चर्चा


लव इंडिया, मुरादाबाद। नॉटिंग टेक्नोलॉजी नेटवर्क, मध्य-पूर्व और अफ्रीका के क्षेत्रीय निदेशक श्री ऋषि गुप्ता ने नवीन तकनीकी समाधानों के जरिए उभरते बाजारों में सतत विकास के अवसर तैयार करने पर चर्चा करते हुए बोले, तकनीक और नवाचारों को अपनाकर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। डिजिटल समाधानों, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हम गहनता से काम कर रहे हैं। श्री गुप्ता तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के प्रबंधन संस्थान टिमिट की ओर से सतत विकास लक्ष्यः चुनौतियां, मुद्दे एवं व्यवहार- एसडीजी सीआईपी 2025 पर आयोजित दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में ऑनलाइन बोल रहे थे। कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन फिजी समेत ओमान, उज्बेकिस्तान, यूके, यूएई, स्विट्ज़रलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि के अंतर्राष्ट्रीय एक्सपर्ट्स ने व्याख्यान दिए। इससे पूर्व टीएमयू के ऑडी में मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के संग इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शंखनाद हुआ। इस मौके पर डीयू की वित्तीय साक्षरता संवर्धन समिति के अध्यक्ष प्रो. आरपी तुलसियन, आईआईटी, रुड़की के प्रबंधन अध्ययन विभाग के एचओडी प्रो. रजत अग्रवाल, इग्नू, नई दिल्ली के प्रो. सुनील कुमार गुप्ता, किरोडीमल कॉलेज के वाणिज्य विभाग की सीनियर फैकल्टी डॉ. पुष्पेन्द्र कुमार सूर्य, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी, देहरादून के कॉलेज ऑफ लॉ के एचओडी डॉ. राधेय श्याम झा, डीएन डिग्री कॉलेज, मेरठ के डॉ. हिमांशु अग्रवाल, टिमिट के डीन एवम् कॉन्फ्रेंस डायरेक्टर प्रो. विपिन जैन, कॉन्फ्रेंस कन्वीनर डॉ. नितिन अग्रवाल आदि मौजूद रहे। सभी मेहमानों को शाल ओढ़ाकर स्वागत किया गया। अंत में स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कॉन्फ्रेंस में संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों- गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ जल एवं स्वच्छता, हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, सतत शहरीकरण और वैश्विक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई। कॉन्फ्रेंस में टीएमयू के वीसी प्रो. वीके जैन की गरिमामयी मौजूदगी रही। अंत में टिमिट के डीन प्रो. विपिन जैन ने वोट ऑफ थैंक्स दिया।

ओमान के डॉ. मुस्लिम बोले, टिकाऊ व्यापार रणनीतियों को बनाना होगा सशक्त

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड साइंस मस्कट, ओमान की फैकल्टी डॉ. मोहम्मद मुस्लिम ने प्रौद्योगिकी और अनुप्रयुक्त विज्ञान के जरिए टिकाऊ व्यापार रणनीतियों को सशक्त बनाना पर व्याख्यान दिया। डॉ. मुस्लिम का दृष्टिकोण अत्यंत व्यावहारिक और दूरदर्शी है। उनका मानना है कि तकनीकी नवाचारों और वैज्ञानिक अनुसंधान को एकीकृत करके व्यावसायिक संगठनों को दीर्घकालीन स्थिरता एवं प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान की जा सकती है। डिजिटल परिवर्तन, डेटा विश्लेषण, और हरित प्रौद्योगिकियाँ उनके विचारों के मूल में हैं।

दक्षता बढ़ाने, लागत कम करने में डेटा-संचालित समाधान जरूरी: सिमरनजीत

फोर्टर सर्विसेज लिमिटेड, वेलसाल, यूके के ऑपरेशन्स एनालिस्ट श्री सिमरनजीत सिंह ने संचालन विश्लेषण के माध्यम से टिकाऊ और कुशल व्यापारिक रणनीतियों का निर्माण करना पर अपने विचार रखे। वह मानते हैं, व्यावसायिक प्रक्रियाओं में दक्षता बढ़ाने, लागत कम करने और संचालन में स्थिरता लाने हेतु डेटा-संचालित समाधान जरूरी हैं, जिससे कंपनियाँ दीर्घकालीन सफलता अर्जित कर सकें।

विज्ञान और नवाचार से ही चुनौतियों पर पा सकते हैं विजय: डॉ. संदीप पोद्दार

नोमुरा इंटरनेशनल पीएलसी, लंदन, यूके की सॉफ्टवेयर देवऑप्स इंजीनियर सुश्री सुखमंजीत कौर ने कहा, डिजिटल परिवर्तन और तकनीकी नवाचार के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को सहयोग देना महत्वपूर्ण है। सुश्री कौर वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में डिजिटल टूल्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और स्वचालन के माध्यम से नवाचार लाकर, पर्यावरणीय और सामाजिक लक्ष्यों के साथ संतुलन स्थापित कर रही हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज-टीसीएस, स्विट्जरलैंड, यूरोप के एसएपी आर्किटेक्चर कंसल्टेंसी सर्विसेज श्री पीयूष माथुर का एसएपी आर्किटेक्चर के माध्यम से व्यवसायों को नवाचार और स्थिरता के साथ आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान है। वह मानते हैं कि इंटीग्रेटेड एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग समाधानों के जरिए व्यापारिक कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है और नवाचार को रणनीतिक रूप से लागू कर दीर्घकालीन स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है।

उच्च शिक्षा संस्थान करें नए विचारकों और उद्यमियों को तैयार: डॉ. अंसारूल

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड साइंस, मस्कट, ओमान बिजनेस स्टडीज विभाग के डॉ. अंसारूल हक ने प्रबंधन शिक्षा एवं अनुसंधान के माध्यम से वैश्विक सतत विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया। डॉ. अंसारूल उच्च शिक्षा के माध्यम से नए विचारकों और उद्यमियों को तैयार करने पर बल देते हैं, जो वैश्विक समस्याओं का समाधान खोजने और सामाजिक-आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में योगदान दें। एलन इंश्योरेंस, यूएसए की वित्तीय सलाहकार सुश्री अनुशी जैन ने वित्तीय रणनीतियों के माध्यम से टिकाऊ आर्थिक विकास और समावेशन को बढ़ावा देने पर मुख्य फोकस किया। वह निवेश और बीमा रणनीतियों के माध्यम से व्यक्तियों और संगठनों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ आर्थिक असमानताओं को कम कर समावेशी विकास की दिशा में कार्य कर रही हैं।

हर वर्ग को समान अवसर प्रदान कर उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए

एंपावर, लंदन, यूके की सह-संस्थापक सुश्री नंदिता मित्तल ने उद्यमिता और मानव संसाधन विकास के माध्यम से समावेशी और स्थायी भविष्य का निर्माण पर अपने विचार व्यक्त किए। वह मानती हैं कि समाज के हर वर्ग को समान अवसर प्रदान कर उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए। उनकी पहल विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण के लिए केंद्रित हैं, जो सतत और समावेशी विकास की नींव रखते हैं। नेशनल यूनिवर्सिटी, ताशकंद, उज्बेकिस्तान के रिसर्च विभाग के हेड डॉ. दानिश अतर वैश्विक अनुसंधान सहयोग द्वारा सतत विकास के लिए नवाचार आधारित समाधान को बढ़ावा देने पर बोलते हुए कहा, नवाचार केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर अनुसंधान सहयोग के द्वारा संभव है। वह अनुसंधान, तकनीकी हस्तांतरण और नवाचार आधारित स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं, जिससे विश्व स्तर पर सामाजिक और आर्थिक सुधार लाए जा सकें।

लिंकन यूनिवर्सिटी कॉलेज, मलेशिया के डिप्टी वाइस चांसलर- रिसर्च एंड इन्नोवेशन डॉ. संदीप पोद्दार ने ऑनलाइन विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, सतत विकास लक्ष्य मानवता की एक न्यायसंगत, समान और सशक्त विश्व के निर्माण की आकांक्षा को दर्शाते हैं। अनुसंधान और नवाचार वे प्रमुख शक्तियां हैं, जो इन लक्ष्यों को साकार करने में सहायक बन सकती हैं। हमें वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए। शिक्षा में निवेश करना चाहिए। युवाओं को सशक्त बनाना चाहिए ताकि सतत विकास के स्वप्न को यथार्थ में बदला जा सके। विज्ञान और नवाचार से ही हम आज की चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की वित्तीय साक्षरता संवर्धन समिति की अध्यक्ष प्रो. आरपी तुलसियन ने कहा, वित्तीय साक्षरता सतत विकास का आधार है, जब तक प्रत्येक नागरिक आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होगा, तब तक गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आर्थिक वृद्धि जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करना संभव नहीं होगा। वित्तीय शिक्षा को सतत विकास पहलों के साथ जोड़ना आवश्यक है, ताकि व्यक्ति से लेकर सरकार तक सभी स्तरों पर उचित निर्णय लिए जा सकें।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, आईआईटी, रुड़की के प्रबंधन अध्ययन विभाग के एचओडी प्रो. रजत अग्रवाल ने कहा, सततता केवल एक नैतिक दायित्व नहीं, बल्कि नवाचार और विकास का एक सशक्त अवसर है। उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारों को मिलकर ऐसे मॉडल विकसित करने चाहिए, जो लाभप्रदता और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित करें। व्यवसायों को सतत विकास को अपनी रणनीति का अभिन्न अंग बनाना चाहिए, जिससे भावी पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली के प्रो. सुनील कुमार गुप्ता बोले, सतत विकास के लिए शिक्षा का समावेशी, सुलभ और नवाचार आधारित होना अत्यंत आवश्यक है। ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग प्रणाली के माध्यम से हम ज्ञान को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचा सकते हैं। शिक्षा के माध्यम से हम जागरूक, उत्तरदायी और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्ध वैश्विक नागरिक तैयार कर सकते हैं।

माया देवी यूनिवर्सिटी, देहरादून के डीन प्रो. आरबी सिंह, जीआरडी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, देहरादून के डायरेक्टर-एडमिशन डॉ. एसएस रावत, माया देवी यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. संदीप विजय, आसागान होटेल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ डॉ. सुधीर अवस्थी, दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोडीमल कॉलेज के वाणिज्य विभाग की सीनियर फैकल्टी डॉ. पुष्पेन्द्र कुमार सूर्य, डीएन डिग्री कॉलेज, मेरठ के डॉ. हिमांशु अग्रवाल, सुपरटेक यूनिवर्सिटी के डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन डॉ. पुलकित अग्रवाल, चार्टर्ड अकाउंटेंसी के प्रैक्टिसनर डॉ. अभिनव अग्रवाल, ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के सीनियर प्रोफेसर डॉ. राजकुमार सिंह, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी, देहरादून के कॉलेज ऑफ लॉ के एचओडी डॉ. राधेय श्याम झा पैनल डिस्कशन में शामिल रहे। कॉन्फ्रेंस में सेक्रेटरी- डॉ. मोहित रस्तोगी, प्रो. चंचल चावला, प्रो. मनोज अग्रवाल के संग-संग डॉ. विभोर जैन, डॉ. सतेन्द्र आर्य, डॉ. प्रतिभा शर्मा, डॉ. चारुल वर्मा, श्रीमती अंशु चौहान, डॉ. बिन्दु मालवीय, डॉ. अविनाश राजकुमार, डॉ. राहुल मल्होत्रा, डॉ. पंखुड़ी अग्रवाल, डॉ. अदिति सिंह, डॉ. अनुषी सिंह, मिस प्राची रस्तोगी, डॉ. पुनीत सेठी, डॉ. राजीव वर्मा, डॉ. केके पाण्डेय, श्री सुमित कुमार आदि उपस्थित रहे।

गणेश वंदना से कृष्ण रास तक सजी सांस्कृतिक संध्या

टीएमयू के ऑडी में टिमिट स्टुडेंट्स की ओर से सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मंगलमयी गणेश वंदना के संग-संग मंगलाचरण पर नृत्य प्रस्तुति से हुआ। श्रीकृष्ण रास के जरिए स्टुडेंट्स ने श्रीकृष्ण की रास लीला को जीवंत करते हुए अद्भुत नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन किया। रास लीला की रंगीन झांकियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया। डुएट सॉन्ग पर युगल प्रस्तुतियों ने सुर और ताल का बेहतरीन संगम प्रस्तुत किया। साथ ही फ्यूजन डांस ने पारंपरिक और आधुनिक नृत्य शैलियों का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत कर सभी को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण स्टेट कल्चरल डांस रहा, जिसमें प्रत्येक छात्र को देश के विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया गया। विविध वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए विद्यार्थियों ने देश की अनेकता में एकता की थीम को साकार किया। स्टुडेंट्स ने संदेश दिया कि भले ही भाषा, परंपरा और संस्कृति में विविधता हो, परन्तु हमारा राष्ट्रीय एकत्व अटूट है। संचालन डॉ. विभोर जैन, श्रीमती दीप्ति राज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में मिस श्रेया खरबंदा की उल्लेखनीय भूमिका रही।

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