Surendra Mohan Mishra Memorial Award से Suresh Chandra Sharma सम्मानित

लव इंडिया, मुरादाबाद। प्रख्यात साहित्यकार, इतिहासकार एवं पुरातत्ववेत्ता स्मृतिशेष सुरेन्द्र मोहन मिश्र की पुण्यतिथि पर मुरादाबाद मंडल के साहित्य के प्रसार एवं संरक्षण को पूर्ण रूप से समर्पित संस्था साहित्यिक मुरादाबाद और विजयश्री वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित समारोह में अमरोहा के वरिष्ठ इतिहासकार (वर्तमान में गाजियाबाद निवासी) सुरेश चंद्र शर्मा को पं सुरेन्द्र मोहन मिश्र स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें मान पत्र, श्रीफल,अंग वस्त्र और सम्मान राशि प्रदान की गई। समारोह की अध्यक्षता साहित्यकार एवं पुरातत्ववेत्ता अतुल मिश्र ने की तथा संचालन डॉ मनोज रस्तोगी एवं विवेक निर्मल ने किया।


नवीननगर स्थित मानसरोवर कन्या इंटर कॉलेज में मनोज वर्मा मनु द्वारा प्रस्तुत मां सरस्वती वंदना से आरंभ समारोह के प्रथम चरण में साहित्यकारों ने स्मृतिशेष पं सुरेन्द्र मोहन मिश्र तथा सम्मानित इतिहासकार सुरेश चंद्र शर्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। साहित्यिक मुरादाबाद के संस्थापक डॉ मनोज रस्तोगी ने कहा 22 मई 1932 को चंदौसी में जन्में पंडित सुरेंद्र मोहन मिश्र ने न केवल साहित्यकार के रूप में ख्याति प्राप्त की बल्कि इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता के रूप में भी विख्यात हुए। उन्होंने अतीत में दबे साहित्य को खोज कर उजागर किया। आपकी मधुगान, कल्पना कामिनी, कविता नियोजन, कवयित्री सम्मेलन, बदायूं के रणबांकुरे राजपूत, इतिहास के झरोखे से संभल,शहीद मोती सिंह, पवित्र पंवासा, मुरादाबाद जनपद का स्वतन्त्रता संग्राम, मुरादाबाद और अमरोहा के स्वतन्त्रता सेनानी ,मीरापुर के नवोपलब्ध कवि तथा आजादी से पहले की दुर्लभ हास्य कविताएं का प्रकाशन हो चुका है तथा अनेक पुस्तकें अप्रकाशित हैं। आपका देहावसान 22 मार्च 2008 को हुआ।
सह संयोजक आवरण अग्रवाल श्रेष्ठ ने कहा कि 22 दिसंबर 1941 को अमरोहा में जन्में सुरेश चन्द्र शर्मा का जनपदीय इतिहास लेखन के क्षेत्र में सुरेशचन्द्र शर्मा का उल्लेखनीय योगदान रहा है। हिन्दू धर्मग्रंथों का सारतत्व कोश, अमरोहा नगर का प्राचीन इतिहास, मातृस्वरूपा सरस्वती और सारस्वत समाज, सनातन धर्म ग्रंथों में गया श्राद्ध माहात्म्य, सम्भल नगर का प्राचीन इतिहास और सनातन धर्म विषयक शब्द नाम परिचय आपकी उल्लेखनीय पुस्तकें हैं। इसके अतिरिक्त महाभारत का संख्यावाची कोश पुस्तक अप्रकाशित है।


सम्मानित इतिहासकार सुरेश चंद्र शर्मा ने जनपदीय इतिहास के पुनर्लेखन और प्रकाशन की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में स्मृतिशेष सुरेन्द्र मोहन मिश्र की रचनाओं का पाठ भी हुआ। उनके सुपुत्र अतुल मिश्र ने उनके गीत का सस्वर पाठ करते हुए कहा….
जीवन भर ये खारे आंसू ही बेचे हैं/ सपन मोल लेने को/ कनक कन गला बेचे, मिट्टी के, पत्थर के/ रतन मोल लेने को /नये पथ बनाने में सुनो, वंशधर मेरे/ कुटिया का तृण-तृण बिक जाये, तो क्षमा करना !!


कार्यक्रम के दूसरे चरण में आयोजित काव्य गोष्ठी में डॉ प्रेमवती उपाध्याय, हरि प्रकाश शर्मा, अशोक बिश्नोई, श्री कृष्ण शुक्ला, ओंकार सिंह ओंकार, डॉ राकेश चक्र, डॉ मीरा कश्यप, राजीव सक्सेना, प्रत्यक्ष देव त्यागी, डॉ धनंजय सिंह, रवि चतुर्वेदी, मूलचंद राजू ,इशांत शर्मा इशू ,सत्येंद्र धारीवाल, डॉ पुनीत रस्तोगी, योगेंद्र वर्मा व्योम, मनोज कुमार मनु, राशिद मुरादाबादी, सरिता लाल, राहुल शर्मा, डॉ कृष्ण कुमार नाज, संजीव आकांक्षी, डॉ ममता सिंह, डॉ अर्चना गुप्ता, राशिद हुसैन, दुष्यंत बाबा मयंक शर्मा, प्रीति अग्रवाल आदि ने काव्य पाठ किया ।

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