संदीप बडोला का फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया में मनोनयन उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के फार्मेसी जगत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह उम्मीद की जा रही है कि उनके अनुभव और नेतृत्व से फार्मेसी शिक्षा, पेशा और स्वास्थ्य सेवाओं में दूरगामी सुधार देखने को मिलेंगे।

उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के फार्मेसी जगत के लिए यह एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण क्षण है। फार्मेसी शिक्षा, पेशे और नीतिगत सुधारों की दिशा में कार्यरत संदीप बडोला को देश की सर्वोच्च फार्मेसी नियामक संस्था Pharmacy Council of India का सदस्य मनोनीत किया गया है। इस मनोनयन से न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के फार्मासिस्टों और छात्रों में नई उम्मीद जगी है।
🏛️ PCI में सन्दीप बडोला का मनोनयन, फार्मा सेक्टर में हर्ष
दिल्ली से बदलेगी फार्मेसी शिक्षा और पेशे की दिशा
उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन एवं Diploma Pharmacist Association Uttar Pradesh के अध्यक्ष संदीप बडोला को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) का सदस्य मनोनीत किया गया है।
उनके दिल्ली स्थित काउंसिल में शामिल होने से फार्मेसी जगत में उत्साह और हर्ष का माहौल है। फार्मासिस्टों, शिक्षण संस्थानों और छात्रों को यह विश्वास मिला है कि अब नीतिगत स्तर पर उनकी समस्याओं और जरूरतों को मजबूती से रखा जाएगा।

🎯 प्राथमिकताएं गिनाईं, सुधारों का रोडमैप बताया शिक्षा, तकनीक, क्लीनिकल फार्मेसी पर रहेगा फोकस
मनोनयन के बाद संदीप बडोला ने कहा कि PCI के सदस्य के रूप में उनकी प्राथमिकता फार्मेसी शिक्षा और पेशे को समय की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करना होगी। उन्होंने बताया कि— फार्मेसी शिक्षा को उद्योग की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाएगा। क्लीनिकल फार्मेसी को बढ़ावा देकर मरीज-केंद्रित सेवाओं को सशक्त किया जाएगा
डिजिटल रिकॉर्ड, ई-हेल्थ और नई तकनीकों (जैसे AI) का एकीकरण किया जाएगा। फार्मासिस्टों के लिए सतत व्यावसायिक विकास (CPD) को अनिवार्य बनाने पर जोर रहेगा। उन्होंने कहा कि इससे फार्मासिस्टों की भूमिका केवल दवा वितरण तक सीमित न रहकर, मरीजों की देखभाल में एक जिम्मेदार स्वास्थ्य पेशेवर के रूप में और मजबूत होगी।
⚖️ PCI की भूमिका और जिम्मेदारियां
फार्मेसी अधिनियम, 1948 के तहत गठित वैधानिक निकाय
संदीप बडोला ने जानकारी दी कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया एक वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना फार्मेसी अधिनियम, 1948 के तहत की गई है। इसके सदस्यों की प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं—
📚 1. शिक्षा का विनियमन
फार्मेसी कॉलेजों और पाठ्यक्रमों के मानक तय करना
शिक्षण संस्थानों को मान्यता देना
शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना
🧾 2. पेशे का विनियमन
फार्मेसी के पेशे के लिए नियम बनाना
व्यावसायिक आचरण के मानक तय करना
नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना
🧑⚕️ 3. फार्मासिस्टों का पंजीकरण
योग्य फार्मासिस्टों का पंजीकरण
लाइसेंस जारी करना और अद्यतन रखना
⭐ 4. मानकों को बनाए रखना
देश में फार्मेसी शिक्षा और पेशे के उच्चतम मानकों को बनाए रखना। बडोला ने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में सुधार और पारदर्शिता उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
🌍 उत्तर प्रदेश को मिलेगा राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत प्रतिनिधित्व
छात्रों और संस्थानों को होगा सीधा लाभ
उनका मानना है कि PCI में उत्तर प्रदेश के सशक्त प्रतिनिधित्व से राज्य के फार्मेसी कॉलेजों, छात्रों और फार्मा सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। नई नीतियों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारतीय फार्मेसी को वैश्विक पहचान मिलेगी।

🗣️ फार्मासिस्ट समाज में उत्साह
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिला मंत्री हेमन्त चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश से पिछले कई वर्षों बाद PCI में संदीप बडोला को यह अवसर मिला है।
उन्होंने कहा कि “यह पूरे उत्तर प्रदेश के फार्मासिस्ट साथियों के लिए गर्व का विषय है। संदीप बडोला के मनोनयन से फार्मेसी पेशे को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।”
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