हम अंधेरों को मिटायें और खुद को बदलना होगा… के रचियता रामदत्त द्विवेदी पंचतत्वों में विलीन

लव इंडिया, मुरादाबाद । वयोवृद्ध साहित्यकार एवं साहित्यिक संस्था हिन्दी साहित्य संगम के अध्यक्ष रामदत्त द्विवेदी का रविवार की सुबह देहावसान हो गया। वह 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। अपने पीछे वह दो पुत्रों और एक पुत्री का भरा पूरा परिवार रोता बिलखता छोड़ गए। उनका अंतिम संस्कार लोकोशेड स्थित मोक्ष धाम में किया गया।
आजीवन हिन्दी साहित्य के प्रति समर्पित भाव से सक्रिय रहे
साहित्यिक मुरादाबाद के संस्थापक अध्यक्ष डॉ मनोज रस्तोगी ने बताया कि 30 जून 1937 को रामपुर की तहसील शाहबाद में पंडित गोपाल दत्त द्विवेदी एवं कैलाशो देवी के सुपुत्र के रूप में जन्में रामदत्त द्विवेदी आजीवन हिन्दी साहित्य के प्रति समर्पित भाव से सक्रिय रहे। उनकी दो काव्य-कृतियां ‘हम अंधेरों को मिटायें’ और ‘खुद को बदलना होगा’ प्रकाशित हो चुकी हैं।

उन्हें साहित्यिक मुरादाबाद की ओर से राजेन्द्र मोहन शर्मा श्रृंग’ स्मृति सम्मान, आदर्श कला संगम द्वारा माहेश्वर तिवारी सम्मान, कला भारती द्वारा कला श्री तथा सरस्वती परिवार द्वारा काव्य भूषण सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
उनकी अंतिम यात्रा रविवार को उनके मिलन विहार स्थित आवास से प्रारम्भ हुई। लोकोशेड स्थित मोक्षधाम में उनके पार्थिव शरीर को उनके सुपुत्र प्रतीक द्विवेदी ने मुखाग्नि दी।

महानगर के साहित्यकारों ओंकार सिंह, रघुराज सिंह निश्छल, डॉ महेश दिवाकर, अशोक विद्रोही, वीरेंद्र सिंह बृजवासी, राम सिंह निशंक, राजीव प्रखर, दुष्यन्त बाबा, जितेंद्र सिंह जौली, मनोज व्यास, मयंक शर्मा, अनुराग मेहता, मनोज मनु, अमर सक्सेना, नकुल त्यागी, डॉ कृष्ण कुमार नाज, उदय अस्त, समीर तिवारी, संजीव आकांक्षी समेत अनेक गणमान्य नागरिकों ने उन्हें अश्रुपूरित नेत्रों से अंतिम विदाई दी।
महानगर की साहित्यिक संस्थाओं मुरादाबाद लिटरेरी क्लब, साहित्यपीडिया, राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, हस्ताक्षर, अंतरा, हरसिंगार, कला भारती, उर्दू सहित्य शोध केंद्र, विजयश्री वेलफेयर सोसाइटी, अल्फाज अपने, साहित्यिक मुरादाबाद, हिन्दी साहित्य संगम, संस्कार भारती, जैमिनी साहित्य फाउंडेशन, अखिल भारतीय साहित्य कला मंच, काव्य धारा,गुंजन प्रकाशन आदि ने उनके देहावसान पर शोक व्यक्त किया है ।

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