Vishwa Hindu Parishad: ममता सरकार को बर्खास्त कर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाएं

लव इंडिया, मुरादाबाद। विश्व हिंदू परिषद ने पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के उत्पीड़न किए जाने के विरोध में मुरादाबाद कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में ममता बनर्जी सरकार को बर्खास्त करने और पश्चिम बंगाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की है।

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय प्रबंध समिति के सदस्य डाॅ. राजकमल गुप्ता के आह्वान पर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता और पदाधिकारी बड़ी तादाद में मंडलायुक्त कार्यालय के पास एकत्र हुए और यहां से नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे जहां पर ममता सरकार को बर्खास्त करो… पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करो…नारे लगाए।

प्रदर्शन के बाद में ज्ञापन लेने के लिए एसीएम अजय मिश्रा आए तो उन्हें ज्ञापन देने से इनकार कर दिया और कहा ज्ञापन डीएम को ही देंगे, वही लेने आए। उन्हें ही ज्ञापन दिया जाएगा। मगर दम नहीं थे। इस पर एडीएम ममता मालवीय ज्ञापन लेने आए। उन्हें ही ज्ञापन देकर विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन समाप्त का ऐलान किया।

इससे पूर्व, वक्ताओं ने कहा कि वक्फ कानून के विरोध की आड़ में संपूर्ण बंगाल को जिस प्रकार हिंसा की आग में जलाया जा रहा है, हिंदुओं को प्रताड़ित किया जा रहा है, राष्ट्र विरोधी और हिंदू विरोधी तत्वों को निर्बाध रूप से अपने षडयंत्रों को क्रियान्वित करने की खुली छूट दी जा रही है, उससे स्पष्ट लगता है कि बंगाल की स्थिति अत्यधिक चिंताजनक है। मुर्शिदाबाद से प्रारम्भ हुई यह भीषण हिंसा अब संपूर्ण बंगाल में फैलती हुई दिखाई दे रही है। शासकीय तंत्र दंगाइयों के सामने केवल निष्क्रिय ही नहीं अपितु कई स्थानों पर इनका सहायक या प्रेरक बन गया है। इससे पहले कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए, केंद्र सरकार को प्रशासन का नियंत्रण व संचालन अपने हाथ में लेकर राष्ट्र विरोधी व हिंदू विरोधी तत्वों को उनके कुकर्मों के लिए कठोर से कठोर सजा दिलवानी चाहिए।

दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि मुस्लिम भीड़ द्वारा 11 अप्रैल, 2025 को वक्फ कानून के विरोध के नाम पर किया गया हिंसक प्रदर्शन कानून बनाने वाली सरकार के विरोध में नहीं अपितु हिंदुओं पर हिंसक आक्रमण के रूप में था जबकि हिंदू समाज का इस कानून के निर्माण में कोई भूमिका नहीं थी और यह एक शुद्ध संवैधानिक प्रक्रिया थी। इसका स्पष्ट अर्थ है कि वक्फ तो केवल बहाना था, असली उद्देश्य मुर्शिदाबाद को हिंदू शून्य बनाना था। इस उन्मादी जिहादी भीड़ ने हिंदुओं के 200 से अधिक घरों और व्यावसायिक दुकानों को लूटकर जलाया, सैकड़ों हिंदुओं को बुरी तरह घायल किया व तीन नागरिकों की निर्मम हत्या की गई। दर्जनों महिलाओं के शीलभंग भी किए गए। परिणाम स्वरूप 500 से अधिक हिंदू परिवारों को मुर्शिदाबाद से पलायन करना पड़ा। उनके पास जाकर उनकी चिंता एवं सहायता करने की अपेक्षा सुश्री ममता बनर्जी दंगा भड़काने वाले इमामों से मिल रही है जिनमें से एक इमाम ने एक दिन पहले ही धमकी दी थी कि ‘अगर ममता बनर्जी ने उनका साथ नहीं दिया तो वह उसकी औकात बता देंगे।”

अब ये सारे तथ्य सामने आने पर यह समाचार मिल रहा है कि ममता जी अब शरणार्थियों को सुविधा देने की जगह उनको वापस जेहादियों के सामने जबरन परोसने का षड्यंत्र कर रही है। आज की बंगाल की स्थिति से यह स्पष्ट है, कि ममता सरकार भारत के संघीय ढांचे को बंगाल में ध्वस्त कर अपनी सरकार और वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है। बंगाल में राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में आ चुकी है। बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों को निर्बाध रूप से आने दिया जा रहा है। उनके आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। पाकिस्तानी तथा बांग्लादेशी आतंकी संगठनों की सक्रियता बढ़ती जा रही है। हिंदुओं के प्रति हिंसा बढ़ती जा रही है और न्यायालय के आदेश पर ही हिंदू त्योहारों को अनुमति मिल पाती है। उनको सुरक्षा देने वाले अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाया जाता है। हिंदू का अस्तित्व खतरे में पड़ चुका है।

कानून व्यवस्था पूर्ण रूप से नष्ट हो चुकी है। तृणमूल के असामाजिक तत्व व जिहादी गुंडो के नियंत्रण व निर्देश पर ही प्रशासन काम करने के लिए विवश है। आज यह हिंसा मुर्शिदाबाद से निकलकर संपूर्ण बंगाल में फैलती जा रही है। अब यह बंगाल तक भी सीमित नहीं रहेगी। इसलिए देश की जनता मांग करती है कि बंगाल में अविलंब राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। बंगाल की हिंसा की जांच NIA के द्वारा करवाई जाए और दोषियों को अविलंब दंडित किया जाए। बंगाल की कानून व्यवस्था का संचालन केंद्रीय सुरक्षा बलों के हाथों में दिया जाए। बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उनको निष्कासित किया जाए। बंगाल व बांग्लादेश की 450 किलोमीटर की सीमा पर तार लगाने का काम अविलंब प्रारंभ किया जाए जिसे ममता बनर्जी ने रोका हुआ था।

इस दौरान, केंद्रीय प्रबंधन समिति के सदस्य डाॅ. राजकमल गुप्ता, अमित गुप्ता (महानगर अध्यक्ष), अविनाश गुप्ता (महानगर मंत्री), सचिन विश्नोई (जिला अध्यक्ष), किशन पाल (जिला मंत्री), अभिनव भटनागर (किला संयोजक), अचल कुमार शर्मा, मिलन कश्यप, धर्मेन्द्र नागर, विशाल, अभिनेश कुमार, अनुज, रोहित, आशीष कुमार, अश्वनी सूद, प्रकाश सिंह, सुभाष पाल आदि रहे।

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