लव इंडिया संभल। गीता ज्ञान यज्ञ के सात दिवसीय पावन आयोजन के द्वितीय दिवस 2 मई को गीता व्यास स्वामी कृष्णानंद ने श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 2, 3 एवं 4 पर अत्यंत गहन एवं जीवनोपयोगी विचार प्रस्तुत किए।

स्वामी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कुरुक्षेत्र में अर्जुन को जो विषाद (मोह और भ्रम) हुआ था, वही स्थिति आज समाज के अधिकांश लोगों की हो चुकी है। आज व्यक्ति स्वयं को सनातनी तो कहता है, परंतु सनातन सिद्धांतों का पालन नहीं करता। मन की इच्छाओं के अनुसार चलने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे धर्म-अधर्म, सही-गलत और विवेक की क्षमता खो देता है और स्वयं ही अपने पतन का कारण बन जाता है।

स्वामी जी ने गीता के मूल संदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि “मनुष्य शरीर नहीं, बल्कि आत्मा है।” आत्मा न कभी जन्म लेती है, न कभी मरती है। वह केवल शरीर धारण करती है। यह आत्मा स्वयं परमात्मा का अंश है, इसलिए संसार के सभी जीव एक ही परमात्मा की संतान हैं।
उन्होंने बताया कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य ‘सेवा’ है, और सेवा का मार्ग कर्मयोग से होकर गुजरता है। कर्मयोगी बनने के लिए निष्काम (निस्वार्थ) भाव आवश्यक है। भोगी व्यक्ति कभी योगी नहीं बन सकता।

स्वामी जी ने समाज में प्रचलित कुछ विकृतियों पर भी प्रकाश डाला—
- जो लोग स्वार्थ पूर्ति के लिए पूजा या सेवा करते हैं, वे पाखंड के मार्ग पर हैं।
- जो केवल अपने परिवार तक सीमित रहकर स्वार्थ में लिप्त रहते हैं, वे पाप के भागी बनते हैं।
- जो व्यक्ति केवल शारीरिक सुखों में लिप्त रहता है, वह आसुरी प्रवृत्ति को धारण करता है।
उन्होंने कहा कि स्थिर बुद्धि, एकाग्रता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ किया गया निष्काम कर्म ही श्रेष्ठ कर्म है। ऐसा व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बनता है और वही सच्चे अर्थों में कर्मयोगी कहलाता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव में डूबकर भजन-कीर्तन का आनंद लिया। वातावरण भगवान के नाम संकीर्तन से गुंजायमान हो उठा और उपस्थित जन भाव-विभोर होकर ईश्वर की भक्ति में लीन हो गए।
अंत में स्वामी जी ने एक प्रेरक सूत्र देते हुए कहा—
भारतीय ज्ञान को जानो, भारत को मानो और सच्चे भारतीय बनो— जीवन का वास्तविक सुख इसी में है।” क्योंकि भारत ज्ञान निष्ट देश रहा है, यहां के ज्ञान का आधार ही अध्यात्म हैं। यहां की सनातन सभ्यता ही भारत की मूल पहचान है ।
यह दिव्य संदेश उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के हृदय में नई ऊर्जा, जागरूकता और जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाने का संकल्प जागृत कर गया। दीपा बाष्णेय और प्रतीक्षा ने मिलकर गीता ज्ञान भजन गाया जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
INDUSCLAY