राष्ट्रीय पुरोहित परिषद का सर्वसम्मत निर्णय
लव इंडिया। आगामी होली पर्व को लेकर चल रहे असमंजस को समाप्त करते हुए राष्ट्रीय पुरोहित परिषद ने होलिका पूजन और दहन की तिथि को लेकर स्पष्ट निर्णय घोषित किया है। परिषद के अनुसार इस वर्ष 2 मार्च को संध्या समय होलिका पूजन तथा 3 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त में होलिका दहन किया जाएगा।
गौरी सहाय मंदिर में हुई अहम बैठक
कोट पूर्वी स्थित गौरी सहाय मंदिर परिसर में राष्ट्रीय पुरोहित परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगर एवं क्षेत्र के ज्योतिषाचार्य, पंडित, पुजारी एवं पुरोहितों ने भाग लिया। विभिन्न पंचांगों के अध्ययन और विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से तिथि का निर्धारण किया गया।
बैठक की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष पंडित अजय शुक्ला ने की, जबकि संचालन पंडित सुंदरलाल तिवारी ने किया।
चंद्र ग्रहण से उत्पन्न हुआ था भ्रम

इस वर्ष पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण होलिका पूजन, दहन और रंगोत्सव की तिथियों को लेकर श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।
परिषद के महामंत्री पंडित शोभित शास्त्री ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि:
2 मार्च (सोमवार) को शाम 7:56 बजे से देर रात्रि तक होलिका पूजन का शुभ मुहूर्त रहेगा।
3 मार्च (मंगलवार) को प्रातः 5:00 बजे से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में होलिका दहन करना श्रेष्ठ होगा।
रंगोत्सव और सत्कार को लेकर दिशा-निर्देश

परिषद के उपाध्यक्ष पंडित कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि 3 मार्च को रंग उत्सव मनाया जाएगा। हालांकि चंद्र ग्रहण के कारण उस दिन भोजन-जलपान का आयोजन वर्जित रहेगा।
उन्होंने कहा कि एक-दूसरे के घर जाकर गुजिया, मिष्ठान आदि खाने-खिलाने की परंपरा 4 मार्च (बुधवार) को निभाई जानी चाहिए।
साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि रंग और गुलाल खेलना परंपरा का हिस्सा है, इसे पूजा या अनुष्ठान नहीं माना जाता, इसलिए ग्रहण काल में रंग खेलने पर निषेध नहीं है।
पंचांगों के अध्ययन के बाद सर्वसम्मति
बैठक में पंडित प्रशांत शर्मा, पंडित जयदेव कौशिक, पंडित उमेश शर्मा, पंडित पुष्पेंद्र कुमार शर्मा, पंडित विशाल शर्मा, पंडित विनीत शर्मा, पंडित राजू शुक्ला, पंडित अजय कुमार शर्मा सहित अन्य विद्वानों ने विभिन्न पंचांगों का अध्ययन कर निर्णय लिया।
इसके अतिरिक्त परिषद ने 27 फरवरी (शुक्रवार) को रंग एकादशी / शोक उठनी एकादशी मनाने का भी आह्वान किया।
श्रद्धालुओं से अपील
राष्ट्रीय पुरोहित परिषद ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे निर्धारित तिथियों और मुहूर्त के अनुसार ही पूजन एवं दहन करें, ताकि धार्मिक परंपराओं का विधिवत पालन हो सके और भ्रम की स्थिति समाप्त हो।
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