STEM शिक्षा पर जिला स्तरीय विचार विमर्श: शिक्षा और विद्यार्थी के बीच नई चुनौतियों में बेहतर तालमेल असंभव नहीं

लव इंडिया, मुरादाबाद। विलसोनिया स्कॉलर्स होम दिल्ली रोड मुरादाबाद में प्रधानाचार्या श्वेतांगना संतराम के नेतृत्व में STEM शिक्षा पर जिला स्तरीय विचार विमर्श कराया गया। इसमें शिक्षा के क्षेत्र में की गई नई चुनौतियां एवं विद्यार्थी और शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाए।

इस अवसर पर महानगर के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों ने शिक्षा जगत की चुनौतियों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए और विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने के लिए नवीन उपायों पर चर्चा की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विलसोनिया ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंन के डायरेक्टर डॉ.आशीष संतराम, विलसोनिया कॉलेज की प्रधानाचार्या संगीता रेवीस और डॉ. सि.बी जादली प्रिंसिपल ऑफ क्रिप्टन स्कूल तथा जिला प्रशिक्षण, समन्वयक रहे।

निर्णायक मंडल में रंजीता रानी पूर्व प्रधानाचार्या खेतान वर्ल्ड स्कूल अमरोहा,विशाल उपाध्याय प्रिंसिपल समर वैली, पूनम अरोड़ा उप प्रधानाचार्य स्प्रिंगफील्ड कॉलेज, डॉ.किरन रेखा बनर्जी सेवानिवृत्त प्रिंसिपल रॉबिन नाथ इंटरनेशनल स्कूल गुड़गांव, बबीता मेहरोत्रा इंस्पायर अवार्ड मानक योजना की जिला नोडल अधिकारी और डॉ.संजय अग्रवाल हेड विज्ञान विभाग विलसनिया डिग्री कॉलेज मुरादाबाद मौजूद रहे।


सभी अतिथियों ने प्रस्तुत किए गए शोध पत्रों और विचारों की सराहना की तथा कहा कि समय के साथ शिक्षा के स्वरूप में बदलाव आ रहा है,ऐसे में शिक्षकों को नई तकनीकों के प्रयोग और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर काम करना होगा।


कार्यशाला की मेजबानी कर रही विद्यालय की प्रधानाचार्य श्वेतांगना संतराम ने कहा कि शिक्षा में नई तकनीक और आधुनिक साधनों का उपयोग समय की मांग है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि शिक्षक और विद्यार्थी के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होना चाहिए,ताकि बच्चों को शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर जीवन मूल्यों और व्यावहारिक ज्ञान से भी जोड़ सके। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में कुल तेरह विद्यालयों से आए 24 शिक्षकों ने भाग लिया और अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।


प्रधानाचार्य ने कहा कि जूनियर कक्षाओं के शिक्षक बच्चों के बौद्धिक विकास की नींव तैयार करते हैं। इस कारण उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने प्रस्तुत शोध पत्रों और नवाचारपूर्ण विचारों को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करें और बच्चों को नई सोच और नए दृष्टिकोण से शिक्षा दें।

इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों ने तकनीकी प्रयोग, संवादात्मक शिक्षण पद्धति, डिजिटल टूल्स के उपयोग और विद्यार्थियों की रचनात्मकता को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। सभी ने एकमत से कहा कि यदि हम मिलजुलकर शिक्षा की चुनौतियों का सामना करेंगे तो विद्यार्थियों को हर क्षेत्र में बेहतर ज्ञान और अवसर प्रदान कर पाएंगे।

राष्ट्रीय स्तर के लिए इनमे से चार शोध पत्र चयन होंगे। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित न रहकर, बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनके भविष्य निर्माण की दिशा में केंद्रित होनी चाहिए।

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