लव इंडिया, मुरादाबाद। जयंतीपुर पुरानी आबादी, मेहराब वाली मस्जिद के निकट रहने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता नूर अहमद एडवोकेट के सात वर्षीय सुपुत्र नूर-ए-रज़ा ने जुमे के मुबारक दिन अपने जीवन का पहला रोज़ा मुकम्मल किया। इतनी कम उम्र में सुबह सहरी से लेकर शाम इफ्तार तक पूरे जोश, सब्र और अकीदत के साथ रोज़ा पूरा करने पर परिवार और मोहल्ले में खुशी का माहौल रहा।
खजूर और पानी से रोज़ा खोला तो घर में जश्न जैसा माहौल

मुरादाबाद पब्लिक स्कूल के छात्र नूर-ए-रज़ा ने पहली बार रोज़ा रखने का इरादा किया तो परिवार ने भी उसे हौसला दिया। दिनभर उन्होंने न केवल रोज़ा रखा बल्कि नमाज़ और दुआओं में भी हिस्सा लिया। परिजनों के मुताबिक, बच्चे ने पूरे उत्साह के साथ दिन बिताया और शाम को इफ्तार के वक्त जब उसने खजूर और पानी से रोज़ा खोला तो घर में जश्न जैसा माहौल बन गया।
दादा-दादी और चाचाओं ने दी दुआएं

नूर-ए-रज़ा के दादा हाजी अकबर अली ने पोते के इस जज़्बे पर खुशी जाहिर करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की दुआ की। बड़े चाचा हाजी नूर मोहम्मद ने बच्चे की हौसला-अफज़ाई की, जबकि छोटे चाचा नूर हसन और निज़ाम अली ने तोहफे देकर उसकी हिम्मत बढ़ाई।
नन्हे रोज़ेदार को मुबारकबाद दी

पिता नूर अहमद एडवोकेट ने बताया कि परिवार के लिए यह पल बेहद खास था। जुमे के दिन पहला रोज़ा मुकम्मल होना अल्लाह की खास रहमत माना जा रहा है। शाम को इफ्तार के दस्तरख्वान पर मोहल्ले के करीबी और रिश्तेदार मौजूद रहे, जिन्होंने नन्हे रोज़ेदार को मुबारकबाद दी।
मोहल्ले में भी रहा उत्साह

इफ्तार के दौरान घर पर रौनक देखने को मिली। मेहमानों ने बच्चे को दुआएं दीं और उसके संकल्प की सराहना की। परिजनों का कहना है कि इस तरह की प्रेरणा से बच्चों में धार्मिक मूल्यों और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
नन्हे नूर-ए-रज़ा के पहले रोज़े की यह खुशी परिवार के लिए यादगार बन गई।
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