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2025 में अब तक केदारनाथ धाम में नहीं हुई भारी बर्फबारी, मौसम में बदलाव बना चिंता का कारण
🗞️ आमतौर पर दिसंबर तक 5–8 फीट बर्फ से ढक जाता है केदारनाथ, इस साल तस्वीर बदली
✍️ विशेष रिपोर्ट | उत्तराखंड। केदारनाथ धाम, जो हर वर्ष सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण पूरी तरह बर्फ की चादर से ढक जाता है, साल 2025 में अब तक इस प्राकृतिक दृश्य से वंचित नजर आ रहा है। दिसंबर का महीना समाप्ति की ओर है, लेकिन अब तक केदारनाथ में वैसी भारी बर्फबारी नहीं हुई, जैसी सामान्य तौर पर हर साल देखी जाती है।
स्थानीय लोगों, पर्यावरण विशेषज्ञों और मौसम पर नजर रखने वालों के अनुसार यह स्थिति असामान्य और चिंताजनक मानी जा रही है।
❄️ हर साल क्या होता है?
आमतौर पर नवंबर के अंत से ही केदारनाथ धाम में बर्फ गिरना शुरू हो जाती है। दिसंबर आते-आते 5 से 8 फीट तक बर्फ जमा हो जाती है। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह बर्फ से ढक जाता है लेकिन 2025 में केवल हल्की बर्फबारी या ऊंची चोटियों तक सीमित हिमपात ही दर्ज हुआ है, जो टिक नहीं पाया।
🌦️ इस साल बर्फबारी क्यों नहीं हुई? जानिए प्रमुख कारण
🔹 1️⃣ कमजोर रहा पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस सर्दी में
👉 पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) समय पर और पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं हुआ।
इसी सिस्टम के कारण उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी होती है।
🔹 2️⃣ लंबे समय तक रहा शुष्क मौसम
दिसंबर के अधिकांश दिनों में
✔ मौसम शुष्क रहा
✔ बादल नहीं बने
✔ तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहा
जिससे बर्फ जमने की अनुकूल स्थिति नहीं बन पाई।
🔹 3️⃣ जलवायु परिवर्तन का असर
पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि
🌍 जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है।
अब बर्फबारी— देर से हो रही है। कम मात्रा में हो रही है
और कभी-कभी अनियमित हो जाती है
📆 आगे क्या? क्या होगी बर्फबारी…?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार—
दिसंबर के अंत से जनवरी 2026 तक
एक या दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकते हैं
जिससे केदारनाथ और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना बढ़ेगी हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि
👉 पहले जैसी भारी और लंबे समय तक टिकने वाली बर्फबारी होगी या नहीं, यह अभी कहना मुश्किल है।

🌱 पर्यावरण और भविष्य पर असर
केदारनाथ में बर्फबारी केवल धार्मिक या पर्यटन दृष्टि से ही नहीं, बल्कि— ✔ जल स्रोतों
✔ नदियों
✔ ग्लेशियर
✔ स्थानीय पारिस्थितिकी
के लिए भी बेहद जरूरी मानी जाती है।
बर्फबारी में लगातार हो रही कमी भविष्य में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत हो सकती है।
🧠 आने वाले महीनों में बर्फबारी संभव
2025 में अब तक केदारनाथ धाम में पारंपरिक भारी बर्फबारी नहीं हुई। यह स्थिति मौसम के बदलते स्वरूप और जलवायु परिवर्तन की ओर इशारा करती है। आने वाले महीनों में बर्फबारी संभव है, लेकिन पैटर्न अनिश्चित बना हुआ है।

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