शहर मेरा दिखता तो आबाद है, मगर दिल की दुनिया बर्बाद है…

लव इंडिया संभल। हिन्दू जागृति मंच के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन, इंडियन स्कॉलर एकेडमी में किया गया, जिसका शुभारम्भ शिवकुमार चंदन, श्रीपाल शर्मा, एवं अजय कुमार शर्मा द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया गया। इस अवसर पर साहित्यिक सेवा हेतु श्रीपाल शर्मा ‘ईदरीशपुरी’ एवं डॉ० संदीप कुमार सचेत को “हिन्दी सारथी सम्मान” प्रदान किया गया।


रामपुर से उपस्थित शिवकुमार चंदन ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुति में पढ़ा-
कमल पुष्प आसीन जगत की, हर गतिविधि मां देख रही। मति गति नीति रीति को देती, सुख दुख रच अभिलेख रही।।
तत्पश्चात् बागपत से पधारे वरिष्ठ गीतकार कवि श्रीपाल शर्मा ‘ईदरीशपुरी’ ने वर्तमान परिवेश पर पढ़ा-
शहर मेरा दिखता तो आबाद है,मगर दिल की दुनिया बर्बाद है। बॅंधे हैं सभी कर्म के बंधनों में, कह दूॅं कैसे यहां सब आजाद हैं।।


मिलावटखोरी पर करारा प्रहार करते हुए वरिष्ठ कवि सुभाष चंद्र शर्मा ने पढ़ा-
नकली घी और दूध दवाएं, स्वास्थ्य को लाभ नहीं करते।चूहामार दवाई खाकर, चूहे नहीं मरा करते।।
डॉ संदीप कुमार सचेत ने सुनाया-
भरे उदर तुम क्या समझोगे, भूखे पेट की आग है क्या? जो सब सुख भोग रहे हैं, वे क्या जाने हतभाग है क्या?


व्यंग्य कवि अतुल कुमार शर्मा ने सुनाया –
दुनिया में कुछ ही बचे हैं जो गिरते हुए को संभालते हैं। वरना लोग अपनों के पैरों में ही जंजीर डालते हैं। मिट चुकी अपने-पराए की पहचान अब तो, क्योंकि लोग साँपों को भी अपनी आस्तीन में पालते हैं।।


कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार सुखपाल सिंह गौर, वीकेश शर्मा, गुरमीत सिंह, स्पर्शी शर्मा, श्रेय कौशिक, आदित्य मनु, सक्षम कौशिक के साथ ही मंच के सदस्य उपस्थित रहे। अध्यक्षता अजय कुमार शर्मा ने एवं संचालन ज्ञानप्रकाश उपाध्याय ने किया।

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