मोहिनी एकादशी व्रत रखने से क्लेश, दोष, भय, चिंता होती है समाप्त

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भागवत प्रवक्ता पं. संदीप आत्रेय शास्त्री, हरिद्वार। मोहिनी एकादशी 19 मई दिन रविवार को पड़ रही है मोहिनी एकादशी अपने आप में एक विशेष एकादशी है।

भागवत प्रवक्ता पं. संदीप आत्रेय शास्त्री, बताते हैं कि मोहिनी एकादशी की एक पौराणिक कथा भी है वैसे तो अन्य कथाए हैं लेकिन एक पौराणिक कथा है कि भगवान राम जब मां जानकी के वियोग में डूबे रहते थे तो उन्होंने अपने कुल गुरु वशिष्ट जी से पूछा कि प्रभु गुरुदेव मै जानकी के वियोग से कैसे बाहर निकल सकता हूं। तो गुरुदेव वशिष्ठ जी ने कहा वैसे तो आप मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम है आपको कोई वियोग कोई ताप सता नहीं सकता। लेकिन फिर भी अपने जनकल्याण की भावना से प्रश्न किया है तो मैं आपको समाधान बता रहा हूं।

भागवत प्रवक्ता पं. संदीप आत्रेय शास्त्री, बताते हैं कि वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का आप व्रत करें। इस व्रत के करने से आपके मन मैं जानकी का जो वियोग है। वह समाप्त होगा। इसलिए आप मोहिनी एकादशी का व्रत अवश्य करें। जो भी व्यक्ति वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का व्रत रखता है उसके मन का ताप, क्लेश, दोष, भय, चिंता सब समाप्त होती है व परम पुण्य की प्राप्ति होती है एकादशी को अन्य ग्रहण नहीं करना चाहिए केवल फलहार लेकर ही एकादशी का व्रत रखना चाहिए ।

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