स्वतंत्रता कोई उपहार नहीं, बलिदानों की अमानत है: प्राचार्या प्रो. चारू मेहरोत्रा
लव इंडिया, मुरादाबाद। 22 जनवरी को गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज मुरादाबाद में वंदे मातरम के द्वितीय चरण के अंतर्गत हिन्दी विभाग द्वारा कविता पाठ का आयोजन किया गया।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. चारू मेहरोत्रा ने अपने उद्बोधन में छात्राओं को वंदेमातरम की पृष्ठभूमि से अवगत कराते हुए कहा कि ‘वन्दे मातरम’ गीत की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में की गयी और 1882 में उन्होंने इसे अपने उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया, जो आगे चलकर स्वतंत्रता संग्राम का एक शक्तिशाली प्रेरणा स्रोत बना; 1896 में प्रथम बार रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा इसका लयबद्ध गान किया गया।

1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया, जिसे 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा दिया। इस वर्ष पूरे देश में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है।

प्राचार्या ने कहा- ‘वंदेमातरम्’ आजादी का गीत है, अटूट संकल्प की भावना है और भारत के जागरण का प्रथम मंत्र है। यह केवल अतीत का गौरव गान नहीं, अपितु भविष्य का आह्वान है। आज भी यह हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता कोई उपहार नहीं, बलिदानों की अमानत है।

बी. ए. पंचम सेमेस्टर की छात्रा सोनम ने डॉ. उर्मिलेश शंखधार द्वारा रचित गीत “गाएंगे गाएंगे हम वंदे मातरम्” का ओजपूर्ण वाचन किया। तृतीय सेमेस्टर की छात्रा छवि रस्तोगी ने”वीर का अभिमान है यह शब्द वंदे मातरम” एवं नताशा और मनीषा ने “प्रारंभ है ये युद्ध का के जल उठा जहान है।” गीत का सस्वर गान किया। अंत में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित गीत वन्दे मातरम के गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

कार्यक्रम का संयोजन विभागाध्यक्ष प्रो. सीमा अग्रवाल ने किया। संचालन प्रो. वंदना पाण्डेय ने किया एवं आभार अभिव्यक्ति प्रो. सुधा सिंह द्वारा की गयी। इस अवसर पर प्रो. सुदेश, प्रो. अपर्णा जोशी, प्रो. एकता भाटिया, प्रो. प्रवीण सैनी, प्रो. इन्दू सिंह राजपूत, डॉ. अपर्णा तिवारी, डॉ. सीमा रानी, डॉ. मोनिका सिंह, डॉ. रेनू शर्मा, डॉ. प्रज्ञा मित्तल, डाँ गुलशन आरा, डॉ. जेबा नाज, रोशनी प्रजापति, शिवि, शिवा आदि उपस्थित रहीं।

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