भारत के हस्तशिल्प सेक्टर को ग्लोबल पहचान दिलाने की तैयारी, ईपीसीएच ने पेश किया बड़ा विजन

लव इंडिया, मुरादाबाद। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (EPCH) ने भारत के हस्तशिल्प सेक्टर को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए एक व्यापक और दूरदर्शी योजना पेश की है। परिषद का उद्देश्य भारतीय हस्तशिल्प को डिजाइन, गुणवत्ता, इनोवेशन और तकनीकी निर्यात के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत स्थिति दिलाना है।इस विजन के तहत कारीगरों और निर्यातकों को सीधे ग्लोबल मार्केट से जोड़ने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक तकनीक अपनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

मुरादाबाद से शुरू होगा आधुनिक क्लस्टर मॉडल

मुरादाबाद बनेगा मॉडल क्लस्टरईपीसीएच के चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना ने बताया कि मुरादाबाद को इस योजना के तहत प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पहले से स्थापित “मॉडल क्लस्टर” के विस्तार के साथ अन्य शहरों में भी इसी तरह के केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

टेक्नोलॉजी और डिजाइन पर फोकस

परिषद ने हस्तशिल्प सेक्टर में टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, डिजाइन इनोवेशन और क्वालिटी सुधार को प्राथमिकता दी है। इसके तहत—आधुनिक टेस्टिंग लैबडिजाइन स्टूडियोडिजिटल टूल्सएक्सपोर्ट ट्रेनिंगजैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

ग्लोबल मार्केट तक सीधी पहुंच

ईपीसीएच की योजना के तहत भारतीय उत्पादों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग और ड्रॉप-शिपिंग मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा।साथ ही, अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में नेटवर्क तैयार कर भारतीय उत्पादों की पहुंच और तेज की जाएगी।

कारीगरों को मिलेगा सीधा लाभ

इस पहल से कारीगरों, MSME यूनिट्स और निर्यातकों को सीधा फायदा मिलेगा। स्किल डेवलपमेंट, जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण के जरिए उन्हें बदलते वैश्विक बाजार के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

निर्यात के आंकड़े

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल हस्तशिल्प निर्यात 33,123 करोड़ रुपये (लगभग 3.9 बिलियन डॉलर) रहा।उत्तर प्रदेश से 7,477 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जिसमें अकेले मुरादाबाद का योगदान करीब 3,966 करोड़ रुपये रहा।

क्या बोले अधिकारी

ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि “यह रणनीति केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा।” “हम निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

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