one nation one election: संविधान में संशोधन नहीं, देश के आधे राज्यों की सहमति लेनी जरूरी


लव इंडिया मुरादाबाद। महानगर के टिमिट सभागार में एक राष्ट्र एक चुनाव पर गोष्ठी कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय मंत्री संगीता यादव ने कहा कि यह कार्यक्रम कोई राजनीति कार्यक्रम नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आवाहन पर विशुद्ध रूप से जनता की राय लेने के लिए सांसद विधायक मंत्री संगठन को जनता के बीच जाकर एक राष्ट्र एक चुनाव लागू करने के विषय पर राय ले रहे है। इसलिए हम आपके बीच उपस्थित हुए हैं आने वाला समय युवाओं का है एक राष्ट्र एक चुनाव क्या है न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका। इन्हीं से देश का सिस्टम चलता है यह जिस पर हम चर्चा कर रहे हैं। यह विधायिका के अंतर्गत आता है। कुछ लोगों के द्वारा एक भ्रम फैला है कि एक राष्ट्र एक चुनाव लागू करने के लिए संविधान में कोई संशोधन करने की आवश्यकता है। देश मे आधे राज्यों की सहमति लेनी जरूरी है। संविधान में संशोधन करने जैसा कुछ नहीं है। यह जनता की राय है। इसलिए हम जनता के बीच हैं। आजादी के बाद देश में 1952 से लेकर 1967 तक एक साथ चुनाव हुए थे। सभी सरकारें 5 साल तक चली थी लेकिन कांग्रेस ने सन 1971 में इस परंपरा को ध्वस्त कर दिया। वही सब अब हम सब को मिलकर लागू करना है। सभी राज्यों के चुनाव एक साथ करने का नियम बना सकते हैं। इसके लिए हमें जनता के बीच आम सहमति लेनी है। बार-बार चुनाव होने से विकासात्मक गतिविधियां ठप हो जाती है। एक राष्ट्र एक चुनाव की प्रक्रिया लागू होने के बाद परिवारवाद की राजनीति पर रोक लग जाएगी। एक ही परिवार में एक ही व्यक्ति लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ेगा।


उन्होंने आगे कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव देश के विकास के लिए जरूरी है। बार-बार चुनाव से विकास प्रक्रिया बाधित होती है व अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।सरकारी संसाधनों का अत्यधिक व्यय होता है। शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा बार-बार बीएलओ के रूप में कार्य करने से स्कूलों में शैक्षिक कार्य प्रभावित होता है। देश सीमा पर सुरक्षा करने वाले सैनिकों को बार-बार चुनाव कराने के लिए सीमा को छोड़कर आना पड़ता है। औसतन हर साल कई चुनाव होते हैं
यदि एक साथ चुनाव कराए जाएं तो इससे समय और धन दोनों की बचत होगी। उन्होंने कहा कि सभी से एक राष्ट्र-एक चुनाव पर जनमत बनाएं बार-बार चुनाव होने से सरकारी तंत्रों की व्यस्तता से विकास के कार्य प्रभावित होता है एक राष्ट्र एक चुनाव सांविधानिक प्रक्रिया थी, कांग्रेस ने इसे खत्म किया । मोदी जी कहते हैं कि जनता एक राय बना ले तो एक राष्ट्र एक चुनाव पारित किया जा सकता है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ महानगर संयोजिका अल्पना रितेश गुप्ता ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है यहां आए दिन कोई ना कोई चुनाव होते रहते हैं लोकसभा विधानसभा स्थानीय निकाय के चुनाव बार-बार और अलग-अलग होते हैं जिससे प्रशासनिक मशीनरी पर बेवजह प्रभाव पड़ता और विकास कार्य बार बार प्रभावित होते हैं 1952, 1957,1962,1967 में चार बार एक साथ चुनाव कराए गए जो की सफल भी हुए एक राष्ट्र, एक चुनाव केवल एक राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली को सशक्त करने और शासन व्यवस्था को स्थिरता देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है इसे लागू किया जाना बहुत जरूरी है।

 वरिष्ठ समाजसेवी डॉक्टर लता चंद्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व कहा था कि हम देश में एक राष्ट्र एक चुनाव को लागू कराएंगे। देश में मोदी सरकार आने के बाद जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35 ए हटी, तीन तलाक का कानून पास हुआ, सीएए लागू हुआ, वक्फ संशोधन अधिनियम बिल पारित हुआ, महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला बिल पास हुआ, आदि बहुत सारे बिल व अधिनियम पारित हुए हैं और लागू हुई एक राष्ट्र-एक चुनाव लागू करना देश को विकास की गति देने के लिए अच्छा कदम है जिसमें हम सभी को सहयोग करना चाहिए ।  
वरिष्ठ समाजसेवी प्रेमवती उपाध्याय ने कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। एक के बाद एक चुनाव होने से आचार संहिता लग जाती हैं जिससे सबसे अधिक विकास कार्य प्रभावित होते हैं। बार-बार होने वाले चुनावों से न केवल आर्थिक संसाधनों की भारी बर्बादी होती है, बल्कि बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है।

संगोष्ठी कार्यक्रम मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय मंत्री संगीता यादव महिला मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शशी चौहान,जिला अध्यक्ष महिला मोर्चा आदेश चौधरी, महानगर अध्यक्ष महिला मोर्चा विजय लक्ष्मी पंडित, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ महानगर संयोजिका अल्पना रितेश गुप्ता, महिला मोर्चा महानगर मीडिया प्रभारी एवं कार्यक्रम संयोजक शीतल चौहान, साहस वेलफेयर सोसाइटी चेयरपर्सन लता चंद्रा, शांतिकुंज परिवार संतोष नारंग,वरिष्ठ समाज सेवी प्रेमवती उपाध्याय,नीलम जैन,अनीता चौहान,श्री चौहान डिंपल, पूनम सैनी, विनीता मल्होत्रा, पंकज शर्मा, पूनम चौधरी, शशि किरण, हेमा खत्री,पूनम बंसल, हिरा भारती, महानगर मीडिया प्रभारी राजीव गुप्ता महानगर मंत्री सर्वेश पटेल, पूनम बंसल, सुनीता रानी,सुषमा सारंग,रोहणी कंसल, अंजली सिंह, सुनीता गुप्ता, डा .महजबी परवीन क्षमा अग्रवाल, नीतू सक्सैना, प्रिया,रचना आदि शामिल रहे ।

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