Dashlakshan festival: उत्तम आर्जव पर टीएमयू कैंपस भक्तिरस से सराबोर

लव इंडिया, मुरादाबाद। दशलक्षण पर्व के तृतीय दिवस उत्तम आर्जव धर्म पर पंच परमेष्टि पूजन, श्री मुनि सुब्रत नाथ जिन पूजा, सोलह कारण पूजन, दश लक्षण पूजन विधि-विधान से हुए। नंदीश्वर द्वीप और पंचमेरु पूजन का अर्घ्य चढ़ाया गया। प्रतिष्ठाचार्य ऋषभ जैन शास्त्री के मार्गदर्शन में ये सभी अनुष्ठान हुए। जैन स्टुडेंट्स और शिक्षकों ने भक्तिभाव में डूबकर श्रीजी की आराधना की।

भक्तांबर पाठ विधान करने का सौभाग्य ध्रुव जैन और आर्जव जैन को मिला। भोपाल से आई सचिन जैन एंड पार्टी ने संगीतमय प्रस्तुति से रिद्धि- सिद्धि भवन झूम उठा। कुलाधिपति सुरेश जैन, श्रीमती वीना जैन, जीवीसी मनीष जैन, श्रीमती ऋचा जैन, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन, श्रीमती जाह्नवी जैन आस्था के सागर में हिलोरे लेते नज़र आए।

दूसरी ओर सांस्कृतिक सांझ को ऑडी में कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट के स्टुडेंट्स की ओर से नाट्य प्रस्तुति भील बना तीर्थंकर मेहमानों और स्टुडेंट्स का दिल छूने में सफल रही। इस प्ले में आदिवासी के जीवन परिवर्तन को दर्शाया गया। कैसे एक सामान्य-सा व्यक्ति अपने सत्कर्मों,साधना और आत्मज्ञान के बल पर तीर्थंकर बन जाता है। संग ही जैन स्टुडेंट्स ने जैन मूल्यों पर सामूहिक नृत्य की भी प्रस्तुति दी।

एक और प्ले टीन डिप्रेशन की भी प्रस्तुति अविस्मरणीय रही। सम्मान समारोह के तहत बीबीए फाइनल ईयर के जैन स्टुडेंट्स को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किए गया। इससे पूर्व दिव्य घोष की मधुर धुनों के बीच जिनालय से रिद्धि- सिद्धि भवन आरती लाने का सौभाग्य टिमिट के डीन प्रो. विपिन जैन, फैकल्टीज़ और जैन स्टुडेंट्स ने प्राप्त किया।

तुमरे बिन हमरा कोई नहीं…सरीखे सुरमय भजनों पर जमकर झूमे श्रावक-श्राविकाएं

रंगम्मा रंगम्मा रे, जब से तेरा दर्श मिला मेरी तो पतंग उड़ गई, ओ पालन हारे, तुमरे बिन हमरा कोई नहीं, णमोकार मंत्र है न्यारा, पत्थर की प्रतिमा प्यारी, हम तो चले जिन प्रभु तुमको मनाने, हम तो तेरे सेवक हैं सदियों पुराने, आ जाओ मेरे गुरुवर, मंदिर बनाया ऐसा जिसकी छटा निराली, मन जब कहीं ना लगे तो टीएमयू आना, मधुबन के पर्वतों पर बैठे हैं पारस स्वामी, संयम की बाजे ढोलक मन मस्त मलंग, कोई तुमसा नहीं, सपने में गुरुवर आए, मेरी भक्ति पर रंग बरसाओ, तेरे चेहरे की यह चमक -दमक बड़ी अद्भुत है, तू इतना प्यारा है, आज कुंडलपुर में बधाई, प्रभु तेरी भक्ति में निखर गई आत्मा सरीखे सुरमय भजनों से संपूर्ण पंडाल भक्तिरस से सराबोर हो गया और छात्रों ने नृत्य करते-करते भक्ति अर्चना की।

प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक का सौभाग्य संकल्प जैन

रिद्धि- सिद्धि में श्रीजी का प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य संकल्प जैन, द्वितीय कलश से तेजस जैन, तृतीय स्वर्ण कलश से अस्तित्व जैन और चतुर्थ स्वर्ण कलश से अक्षत जैन ने प्राप्त किया।

प्रथम स्वर्ण कलश से श्रीजी की शांति धारा करने का सौभाग्य राज जैन, हर्षित, आयुष और हर्षित,जबकि द्वितीय रजत कलश से प्रिंस, अक्षत, दीप, प्रसन्न, ऋषभ, आयुष, सौम्या और ऋषभ जैन ने प्राप्त किया। साथ ही अष्ट प्रातिहार्य का सौभाग्य अष्ट कन्याओं – कु. दिव्या, इशिका, रितिका, परी मोदी, नित्या, रिद्धिमा, दृष्टि और दिव्यांशी जैन ने प्राप्त किया।

धर्ममय माहौल में तत्वार्थ सूत्र जैसे संस्कृत के क्लिष्ट शब्दों वाली रचना के तृतीय अध्याय को छात्रा इशिका जैन ने बड़े ही रोचक और भावपूर्ण तरीके से किया। इन सभी के पुण्य की अनुमोदना करते हुए टीएमयू प्रथम महिला श्रीमती वीना जैन ने प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने वालों को सम्मानित किया। शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त करने वालों को डॉ. कल्पना जैन, डॉ. अर्चना जैन और श्रीमती अहिंसा जैन ने सम्मानित किया। श्रीमती जाह्नवी जैन ने अष्टकुमारियों का सम्मान किया।

उत्तम आर्जव के दिन हमें मन, वचन, काय को एक जैसा रखना चाहिए: प्रतिष्ठाचार्य

प्रतिष्ठाचार्य ऋषभ भैया बोले, उत्तम आर्जव के दिन हमें मन, वचन, काय को एक जैसा रखना चाहिए। मन, वचन, काय को सरल रखना है। मायाचारी करने से तिर्यंच गति मिलती है। परमर्षि स्वस्ति मंगल पाठ मे पुष्प क्षेपण रिद्धि धारी मुनीवारों को की जाती है, रिद्धि को नहीं की जाती है। सौधर्म इंद्र मूल शरीर को छोड़कर भगवान के कल्याणक में नहीं जाते हैं। भक्तिमय इस कार्यक्रम के दौरान प्रो.वीके जैन, प्रो. विपिन जैन, श्री विपिन जैन,प्रो. रवि जैन, डॉ. अर्चना जैन, डॉ. आशीष सिंघई, डॉ. विनोद जैन, डॉ. रत्नेश जैन, डॉ. सपना, श्रीमती अंजलि सिंघई आदि उपस्थित थे।

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